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ritesh deo

Inspirational

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ritesh deo

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अच्छे कर्म और सम्मान

अच्छे कर्म और सम्मान

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दान पुण्य तू कर ले बंदे

किसके लिए तू अधर्म करता है।

कौन है तेरा सगा इस जग में

झांक कर देख तू अपने

अंतर्मन में ।

यहां कोई किसी का सगा नहीं

कोई नहीं ऐसा इंसान

जो बनके शैतान किसी को ठगा नहीं ।

ना मां ना बाप ना भाई ना बहन

ना बेटा ना बेटी ना सगा ना पड़ोसी

ये सब ज़रूरतों के हिसाब से रिश्तें हैं

कभी ना पूरी होने वाली किस्तें हैं।

पृथ्वी भ्रमण पर निकला मानव

देख दुनियां की माया जाल

उसमें फंसता उलझता जाए ।

सिर्फ स्वार्थ की सिद्धि के लिए

दर दर भटकता जाए।

धन दौलत की तो दूर की बात

अपना तन भी यहां से ना ले जा पाए ।

फिर कहे का छल प्रपंच

कहें कपट कचौड़ी खाए ।

जब अंत समय आए तो बस

रोए और पछताए

दुनियां में जब आए हो तो

कुछ काम दुनियां के लिए कर जाओ ।

सच्चाई की घूट पीकर

उजाला हीं उजाला फैलाओ।

क्योंकि दुनिया के इस रंग मंच पर

केवल अभिनय हीं रह जाता है ।

जिसका जितना अच्छा अभिनय

बस याद वही रह जाता है।

हैं आदमी के अच्छे कर्म ही साथी

जो बैतरणी पार ले जाए ।

वरना जग के पाप उसे

खोद खोद कर खाए ।

खुशियां भरी इस दुनिया में बस

वह दर दर ठोकर खाए।

और अच्छे कर्म वालों को

हमेशा याद किया जाए

सदा सम्मान दिया जाए।

सदा सम्मान दिया जाए।


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