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ABHINAV SHUKLA

Romance Fantasy

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ABHINAV SHUKLA

Romance Fantasy

अभिनव प्रेम

अभिनव प्रेम

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नव युग का नव उदय हुआ है।

नव युग का नव उदय हुआ है।

किसी डगर पर किसी नगर में, मौन हृदय के टकराने पर,

दो मलमास गुजर जाने पर,

अब जाकर माना आईना...

अब जाकर माना दर्पण ये,


प्राणी कोई प्रणय हुआ है।

नव युग का नव उदय हुआ है।

तटबंधों की सारी उपमायें ले हारा यौवन गुजरा।

नयनों के आगे से कोई मतवाला इक मधुबन गुजरा।

दीप्तिविमा पर हो आरूढ़ हृदय गत होता,

सीधे दृग गृह को नम करता सावन गुजरा।


प्रथम प्राप्त उपमानों को अपदस्थ बनाता,

सम्बंधों में नव(इक) मुखमण्डल विलय हुआ है।

नव युग का नव उदय हुआ है।

चलो सुभीता हुआ नयन को,

हृदय चयन देखेंगी।

दुनौ पुतरियाॅं अब मनमाफिक प्रेम रतन देखेंगी।


आत्मायिक कुछ दृश्यों को घनघोर समेटे,

प्रेमपगा परिणय उदात्त अयन देखेंगी।

पुनर्मिलन की पुनर्व्यवस्था को पथ देता,

पुनर्जागरण का प्रायोजित समय हुआ है।


नव युग का नव उदय हुआ है।

नव युग का नव उदय हुआ है।


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