अब वो बुराइयाँ
अब वो बुराइयाँ
अब वो बुराइयां मैं छोड़ना चाहता हूं
अब वो तन्हाइयां मैं छोड़ना चाहता हूं
बहुत दिनों तक आंसू बहा लिए है,मैंने
अब औऱ आंसू नहीं बहाना चाहता हूं
कुछ आदतें बहुत ज़्यादा बुरी थी मेरी
जिसने ख्वाबो की नींद तोड़ दी थी मेरी
अब बुरे ख्वाबों को छोड़ना चाहता हूं
अब वो बुराईयां में छोड़ना चाहता हूं
काम को शुरू कर बीच में ही छोड़ देना
आलस्य के मारे बीच राह मे सुस्ता लेना
अब आलस्य की वो माटी उड़ाना चाहता हूं
बहुत सोया रहा हूं बहुत ख़ोया रहा हूं
अब नींद से खुद को मैं उठाना चाहता हूं
सबसे बड़ी बुराई है मेरी समय की पाबंदी नहीं है मेरी
अब ख़ुद पर में अनुशासन चाहता हूं
अब वो बुराइयां में छोड़ना चाहता हूं
पूरे दिन व्हाट्सप,फ़ेसबुक देखना
खाना खाने तक को भी भूल जाना
अब फ़ोन की बीमारी को हटाना चाहता हूं
ऊपर से भले में तन को सुंदर न बना पाऊं
पर अपने दिल को सुंदर बनाना चाहता हूं
अब वो बुराईयां में छोड़ना चाहता हूं
बाहर से उपदेश दूँ ख़ुद को नहीं सुदेश दूँ
अब अपनी नज़रो को स्वस्थ करना चाहता हूं
दूसरों की बुराई करते रहना ख़ुद की बड़ाई सुनते रहना
ये अब में छोड़ना चाहता हूं बहुत ऊंचे खजूर पर चढ़ लिया हूं
अब नीचे उतरकर आमवृक्ष बनना चाहता हूं
अब वो बुराइयां में छोड़ना चाहता हूं
ख़ुदा ने मुझे चोला दिया है मानव का
काम करता रहा में अब तक जानवरों का
अब वहशीपन छोड़, इंसान बनना चाहता हूं।
