STORYMIRROR

Dipak Kumar "Girja"

Inspirational

4  

Dipak Kumar "Girja"

Inspirational

आत्मविश्वास

आत्मविश्वास

1 min
17

ऐ खुदा झुकने पे तुझको

मज़बूर कर दूंगा

राहो के सारे मुश्किलो को

दूर कर दूंगा

ऐ खुदा झुकने पे तुझको —-


सपनो की मंज़िल जब तलक

हासिल नहीं होती मुझे

उम्मीद की राहो पे यूँ ही

बस क़दम चलते रहेंगे

रहमत करे या दे सज़ा

मंज़ूर कर लूँगा

ऐ खुदा झुकने पे तुझको —-


हाँथ की बेबस लकीरो

को नहीं मै मानता

क्या लिखा है तूने इसमें

मै नहीं ये जानता

चट्टान भी हो सामने

तो चूर कर दूंगा

ऐ खुदा झुकने पे तुझको —-


गैरत नहीं मई मांगता

मेहनत का है बस वास्ता

ग़र दिखा सकता है कुछ तो

बस दिखा मुझे रास्ता

मेहनत से अपने रात को भी

नूर कर दूंगा

ऐ खुदा झुकने पे तुझको —-


ഈ കണ്ടെൻറ്റിനെ റേറ്റ് ചെയ്യുക
ലോഗിൻ

More hindi poem from Dipak Kumar "Girja"

अफ़सोस

अफ़सोस

1 min വായിക്കുക

तन्हायी

तन्हायी

1 min വായിക്കുക

ख़ामोशी

ख़ामोशी

1 min വായിക്കുക

फ़िक़र

फ़िक़र

1 min വായിക്കുക

तेरा ग़म

तेरा ग़म

1 min വായിക്കുക

बेवफ़ाई

बेवफ़ाई

1 min വായിക്കുക

जुदाई

जुदाई

1 min വായിക്കുക

दीदार

दीदार

1 min വായിക്കുക

Similar hindi poem from Inspirational