जुदाई
जुदाई
1 min
8
होंठों पे लिए मुस्कान
तुम्हारा दर्द छुपाये बैठा हूँ
आस भले झूठी हो पर मैं
आस लगाए बैठा हूँ
होंठों पे लिए———
कोई हाल जो मेरा पूछे तो
हाल बताता अच्छा हूँ
पर तेरे जुदाई का दिल में
नासूर छुपाये बैठा हूँ
होंठों पे लिए———
सूरज की पहली किरण हो
या ढलते दिन का अँधेरा हो
पता नहीं कब क्या गुज़रा
मैं जाम लगाए बैठा हूँ
होंठों पे लिए———
हर एक तमन्ना तुमसे थी
तुमसे थे बंधे अरमान मेरे
अपने अरमानों की चिता
मैं खुद ही सजाये बैठा हूँ
होंठों पे लिए———
मैं क्या बोलूँ और किससे कहूँ
कुछ समझ नहीं आता हमको
मैं ग़म के तूफानों में एक दीप
जलाये बैठा हूँ
होंठों पे लिए———
