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Dipak Kumar "Girja"

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Dipak Kumar "Girja"

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तन्हायी

तन्हायी

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तुम्हें जब कभी हम दिखायी ना दे तो

समझ लेना किस्सा ख़तम हो गया है

कभी जब गली तेरी सूनी लगे तो

समझ लेना सूना चमन हो गया है


कभी जब हकीकत ये होगा फ़साना

तो चर्चे तुम्हारे बहुत यार होंगे

लोग देंगे तुम्हें नाम से मेरे ताने

ज़माना बड़ा बेशरम हो गया है


करी हमने तुमसे बड़ी मिन्नतें पर

कभी तुमने दिल की कहानी सुनी ना

बहुत अश्क़ मैंने बहाये लहू के

मगर राह मैंने तो दूजी चुनी ना

सच्ची मोहब्बत थी जालिम हमारी

तेरे नाम पे दिल दफन हो गया है


ज़माने में आशिक मिलेंगे हजारों

मगर मुझ सा सच्चा ना साथी मिलेगा

बहारों की कलियाँ ये जो खिल रही है

मेरे बाद तुमको वीराना मिलेगा

बड़ा सख्त है ये लहज़ा तुम्हारा

ना जाने तुम्हें क्या भरम हो गया है


दिल कभी जब किसी से लगाया ये होता

दिल दुखाने से पहले तेरा दिल ये रोता

तस्सवुर में भी बेवफाई न करते

अगर आशियाना बसाया जो होता

तेरे आँखें मुझको बता ये रहीं है

की दिल से तेरे अब रहम खो गया


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