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Dipak Kumar "Girja"

Others

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Dipak Kumar "Girja"

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तेरा ग़म

तेरा ग़म

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आप वो ख्वाब जिंदगी में दिखाते न कभी

हम भी फिर आप पे हक़ यूँ जताते न कभी


हमने तो आपको एक नूर ए फरिश्ता समझा

वर्ना हमराज़ तुम्हें हम भी बनाते न कभी


किसी की जाने से यूँ दर्द ग़म का मिलता है

हम ये दिल आपसे जिंदगी में लगाते न कभी


हमने ये सोचा हमसफ़र तुम बनोगे मेरे

वर्ना दिल आपकी राहों में बिछाते न कभी


तुमने ग़र चाहा जो होता एक पल भी सनम

तुम मुझे छोड़ के यूँ ग़म में जाते न कभी



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