STORYMIRROR

Neerja Pandey

Abstract

4  

Neerja Pandey

Abstract

आत्मनिर्भर

आत्मनिर्भर

1 min
245

जश्न आज संविधान का अपने हम सब मना रहे,

प्रगति की राह में नए कदम बढ़ा रहे।


हर राह में विजय पताका हम लहरा रहे,

जीत का हम अपने जश्न मना रहे।


पास हमारे आज समृद्धि है खुशहाली है,

हमारी आत्मतिर्भरता के आगे दुनिया हारी है।


धरती से आसमान तक पंचम हमने लहराया,

चांद पर जाने का ख्वाब भी पूरा कर दिखाया।


मंत्र संयम का इस जहां को सिखलाया,

कोरोना से भी बाज़ी जीत दिखलाया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract