STORYMIRROR

Tanha Shayar Hu Yash

Tragedy

3  

Tanha Shayar Hu Yash

Tragedy

आत्म व्यथा

आत्म व्यथा

1 min
156


मौत का क्या है तनहा 

बस आ जाती है ,

बहाने जिंदगी जीने के 

सारे खा जाती है । 


कई बार जब मैं भी 

बहुत थक जाता हूँ ,

ये नींद बिन बुलाए 

आँखो को भा जाती है । 


जब सोया हुआ समझा  

देखा खुद को मैने, 

तब महसूस किया ये 

वक्त को खा जाती है। 


अब बिलकुल नींद नही 

आँखे खुली खुली सी है 

एक जुनून बनी जिंदगी 

हर मंजिल को भा जाती है ।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy