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Bhawna A. Milan। साहित्य का सफर

Inspirational


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Bhawna A. Milan। साहित्य का सफर

Inspirational


आशियाना

आशियाना

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है वीरों का सरहद पे आशियाना,

तले आसमां के धरा को सजाना।

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लुटा अपनी जाँ, हँसते-हँसते वो जाते,

ज़रा कोई सीखे इश्क इनसे निभाना।

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जिन्हें अपनों की याद होगी सताती,

है आता उन्हें सबसे अश्क छिपाना।

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सर्द हो या गरम, तुम डटकर खड़े,

न भूले तुम देश पे जान लुटाना।

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वो अम्मा की लोरी,वो आँखों में गोरी,

छोटी लाड़ो के आँसू तुंन्हे हैं आते भुलाना।

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ए वीर मेरे फिर से संकट है छाया,

मात-धरा को बस तुम्हें है बचाना।

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तुम्हीं हो समर्थ है तुममें वो शक्ति,

स्वर्ण अक्षर में लिक्खा तुम्हारा फसाना।

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महाराणा तुम्हीं हो भगत भी तुम्हीं हो,

तुम्हें आता है दुश्मन को मार भगाना।

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खुद में जोश बढ़ा लो, भाल तिलक सजा लो,

जाँ हथेली पे रख, चल फिर इतिहास बनाना!



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