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Rakesh Kumar NAGAR

Abstract

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Rakesh Kumar NAGAR

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आशा की किरण

आशा की किरण

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मौत का सन्नाटा

पृथ्वी को निमग्न करता 

किरण के प्रत्येक स्त्रोत को भकोसता

अपना एकछत्र आधिपत्य दर्शाता,


निराशा का आशा पर 

मानव आत्मा, प्रभावों से कलुषित होती,

छटपटाती यंत्रणादायक व्यथा व्यथा से 

मरणासन्न मत्स्य की भाँति 


एक घायल अनसुनी चीख 

व्याप्त होती वायुमंडल में 

अश्रु गिरते एक पिघलते पिघलते लावा से

पृथ्वी की गर्भ से 


जबकि फैली आँखें करती 

क्षितिज का सुक्ष्म विश्लेषण  

एक आशा की किरण के लिये।


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