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Rakesh Kumar NAGAR

Others

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Rakesh Kumar NAGAR

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करप्सन ( भ्रष्टाचार)

करप्सन ( भ्रष्टाचार)

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मैं करप्सन हूँ' जो मर चुका हूँ

सदियों पहले दफ़न हुआ मैं

पहले सड़ा फिर गंधाया 

सूखा तब बना राख मैं

घुलमिल गया मिट्टी से

पहुँचा आप में आहार बनकर

बना दिया जहाँ को करप़सनमय

अब आप खुद मिट मझे मिटा

है ताकत ऐसा करने की

मैं था मैं हूँ मैं रहूँगा 

हमेशा और ताकतवर अजर अमर



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