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Triveni Mishra

Abstract

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Triveni Mishra

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आओ बनाएँ स्वर्ग से सुंदर धरा

आओ बनाएँ स्वर्ग से सुंदर धरा

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आओ बनाएँ स्वर्ग से सुंदर धरा

जिसमें रहे आदमी बनकर खरा

प्रकृति का करें संरक्षण हम सभी

बना रहे पर्यावरण सदा हरा-हरा।


बहे शुद्ध समीर चहुँ दिशाओं में

लहराती गुनगुनाती फसल खेतों में

किसान गाते रहे ख़ुशी से कजरी

पक्षियों का दल उड़ते रहें उन्मुक्त गगन में।


मुस्काराएँ प्रसून बाग उपवन में

झूमते रहें पेड़-पौधे कानन में

देते रहें संसार के जन को औषधी

भरी रहे ख़ुशियाँ धरणी के दामन में।


कदम से कदम मिला कर सब चले

वसुन्धरा की गोदी में पुष्प सा खिले

जीवन सुंदर ख़ुशहाल बनता रहे

धरती में सुख-चैन का गान पले।


हो निरोगी आदमी की काया

कहर बन ना बरसे रोग की छाया

हौंसला हो जन मानस जीव-जन्तु में

परीक्षा में ही वीरता का भाव आया।


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