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Deepak Kumar jha

Children

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Deepak Kumar jha

Children

आंखों में ख्वाब दिख गए,

आंखों में ख्वाब दिख गए,

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"इन पैरों के छाले नहीं दिखे।

 हाथ काले काले नहीं दिखे।


 जीत दिख रही है सामने से, 

 पीठ में चुभे भाले नहीं दिखे।


 मंजिल पर दिख रहें हैं हम,

 कितने तोड़े ताले नहीं दिखे।


 आंखों में ख्वाब दिख गए, 

 आंखों के जाले नहीं दिखे।


 लोग ताली बजाते दिखे,

 साथ घर वाले नहीं दिखे।


 चांद तारों में जीवन दिखा, 

 जीवन में उजाले नहीं दिखे।


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