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Jyoti Mishra

Abstract

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Jyoti Mishra

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आहटें

आहटें

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पंछियों की चहचहाटें हैं चारों ओर, 

हवाओं कि सरसराहटें हैं चारों ओर !

ऐसे में यूँ लगे कि तेरी आहटें भी हैं कहीं,

और यूँ भी कि तू आ जाए 

और हम उड़ जाएं नील गगन में पंछी बनकर 

और महक जाएं इन हवाओं में खुशबू बनकर !!

 


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