ये कैसा खुमार
ये कैसा खुमार
जीवन के हर लम्हे में हर कोई है किसी खुमार में !
कहीं किसी को अपनlही अपना बस है खुमार !
कहीं तो अपने पैसों का है खुमार !
कहीं नशे का है खुमार !
कहीं जीवन में आगे जाने का है खुमार !
कहीं न कहीं तो हो उस इश्क़ का खुमार,
जिस पर सारे खुमार को जाएं कुर्बान !
