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Jyoti Mishra

Abstract

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Jyoti Mishra

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ये कैसा खुमार

ये कैसा खुमार

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 जीवन के हर  लम्हे में हर  कोई है किसी खुमार में !

कहीं  किसी को अपनlही अपना बस है खुमार !


कहीं तो  अपने पैसों का है  खुमार !

कहीं नशे का है खुमार ! 

कहीं जीवन में आगे  जाने का है खुमार !


कहीं  न कहीं तो हो उस इश्क़ का खुमार, 

जिस पर सारे खुमार को जाएं  कुर्बान !


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