आ जाना दिकु
आ जाना दिकु
सुनो दिकु......
कभी तुम्हें गम सताये
तो आ जाना
कभी मेरी यादें चिल्लाए
तो आ जाना
कभी दिख जाए परछाई में चेहरा मेरा
कभी याद आये तुम्हारे लिए वो रात का पेहरा मेरा
कभी आखों में नींद ना आये
तो आ जाना
कभी दर्द आखों से मुस्कुराए
तो आ जाना
जानते है बहुत ही साहसी हो तुम
अपने चेहरे की उदासी बखूबी छुपाती हो तुम
कभी यह मुस्कुराहट साथ छोड़ जाए
तो आ जाना
प्रेम आज भी वहीं खड़ा है तुम्हारे इंतज़ार में
कभी तुम्हारा सब्र अपनी सीमा तोड़ जाए
तो आ जाना।

