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नामर्द
नामर्द
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© Gaytri Joshi

Drama Inspirational

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राशि की आँख खुली तो उसने खुद को एक अंजान कमरे में पाया। घबरा कर खिड़की से बाहर झाँक कर देखा तो एक बारगी तो अपने रिश्ते के चाचा को देखकर उसकी आँखें खुशी से चमक उठी लेकिन दूसरे ही पल उसकी खुशी काफूर हो गयी जब उसने उन्हें एक मोटी सी औरत से नोटों की गड्डी लेते हुए यह कहते सुना, "अब राशि आपकी हुई सितारा बाई।"

उसने चारों तरफ नजर दौड़ाई।सजी धजी महिलाएँ घुंघरुओं की आवाज और तबले की थाप। यह क्या........ उसे समझते देर न लगी। वह पीछे के दरवाजे से सरपट गति से दौड़ती चली गयी।

अचानक वह आयशा से जा टकराई जो कि अपनी टोली के साथ किसी के यहाँ बेटा होने की खुशी में नाच-गा कर लौट रही थी।

"क्या हुआ बच्ची ? तुम इस तरह कहाँ दौड़े जा रही हो ?

वह हाँफते हुए बोली , " मुझे बचा लो, वो मेरे चाचा....."

तभी उसके चाचा, सितारा बाई के साथ उसके पीछे-पीछे दौड़ते हुए आये।

आयशा ने मामले को भाँपते हुए बच्ची को अपने आँचल में छिपाते हुए कहा, "खबरदार अगर किसी ने इस बच्ची को छूने की कोशिश की। आज से ये मेरी जिम्मेदारी है। मैं इसे पढ़ा लिखा कर अपने पैरों पर खड़ा करूँगी।"

" हमें नामर्द कहते हो, और तुम ?"

" आ......क्........थू ।"

किन्नर नामर्द नारी मात्र देह

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