STORYMIRROR

Saini Nileshkumar

Abstract

3  

Saini Nileshkumar

Abstract

कहानी

कहानी

1 min
392

मोह्हबत सफऱ पे हुई कहानी शुरू हमारी

पर शायद समाज को मंजूर नहीं थी कहानी हमारी

बिन मौसम की बरसात मै भी साथ थे

पर खुदा को हमारी नजदीकिया मंजूर नहीं थी


हम तो तेरी सोहबत से खुशनसीब हुऐ

पर हमारी खुशनसीबीया दुनिया को नहीं थी मंजूर

बिछड़े है आज उस गली जिस गली फूल थे छाये कभी

मौसम आज भी वही है बस साथ हम नहीं है


दुनिया ने रखी कहानी अधूरी हमारी

पर दुआ है रब से कभी अधूरी ना हो तेरी खुशियों की कहानी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract