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Veena rani Sayal

Inspirational

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Veena rani Sayal

Inspirational

कविता

कविता

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मात- पिता हैं पहले गुरु,जीवन इनसे हुआ शुरू

जब तक सांस है मेरे तन में ,इनको मैं प्रणाम करूं


उंगली पकड़ कर चलना सिखाया,

हाथ पकड़ कर लिखना सिखाया,

बड़ों का आदर करना सिखाया,

प्यार का मुझको सबक सिखाया

जब भी चोट लगी जीवन में

सहनशीलता का पाठ सिखाया

विद्यालय में दाखिल करवाकर 

गुरु को मेरा हाथ थमाया

मात - पिता और गुरु ने मुझमें

ज्ञान का अनमोल दीप जलाया

पाकर विद्या, कुछ बनकर ,

देश की सेवा शुरू करूं जब तक सांस है

मेरे तन में,हर गुरु का सम्मान करूं


नादानी में हद से बढ़ के

ऐसी वैसी मांग जो की

पिता ने यह ही समझाया

इधर उधर की बातों में 

समय को न बरबाद करो

विद्या अनमोल धन होगा

तो हर उलझन का हल होगा

चोर भी लूट न पाएगा

जो ज्ञान ग्रहण किया तूने

हर पल साथ निभाएगा

मेहनत की रोटी को अपना दीन ईमान करूं

जब तक सांस है मेरे तन में,गुरु का सम्मान करूं


दिन गुजरे ,साल महीने

गुरुओं की शिक्षा ने साथ दिया

आज जो भी हूं सब उनकी बदौलत

सब गुरुओं ने मुझे 

सही गलत का ज्ञान दिया

इस मुख से उनकी महिमा का 

मैं तो बस गुणगान करूं

गुरु के चरणों की पावन धूल

सिर माथे पर तिलक करूं

इतनी शक्ति दे दो भगवान

ज्ञान से रोशन जहान करूं

जब तक सांस है मेरे तन में,

गुरु का सम्मान करूं।



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