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ज़िंदगी
ज़िंदगी
★★★★★

© Archana Goyal

Inspirational

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आ ज़िंदगी तुझे सवार दूं
तू बिखरी बिखरी अच्छी नहीं लगती

सूने से माथे पे तेरे खुशियों की बिंदियां लगा दूँ
तू उजड़ी उजड़ी सी अच्छी नहीं लगती

आ ज़िंदगी...

खाली खाली आंखों में चाहत के रंग भर दूं
तेरी सूनी सूनी आंखें अच्छी नहीं लगती

आ ज़िंदगी...

बिन मकसद के तू चलती जाती
आ तुझे मंजिल की पाजेब पहना दूं
लड़खड़ाती सी तू अच्छी नहीं लगती

आ ज़िंदगी...

बिखरी सी ज़िंदगी

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