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Dr.Purnima Rai

Abstract

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Dr.Purnima Rai

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नारी अब अबला नहीं

नारी अब अबला नहीं

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नारी अब अबला नहीं, रखती नर सा तेज

हिम्मत से आगे बढ़े, छोड़ फूल सी सेज


हर मुश्किल आसान हो, नारी का हो संग

प्रेम लुटाकर भर रही , जीवन में नव रंग


विपदाओं के पार भी, है देखो संसार

खुशियाँ आंगन में खिलें, नारी को दे प्यार


देवी , चण्डी से बनी, नारी की पहचान

नारी का अरमान है, बढ़े देश की शान


नारी का अपमान जो, करते हैं हर रोज

अपनी हस्ती के लिए, घर की करते खोज


चाह करें जो पुत्र की, नारी को दें मान

कन्या-पूजन से बने, जग में पुरुष महान


अभिलाषा पूरी करें, बेटी को दें ज्ञान,

भारत माँ के मुख सजे, फिर सुन्दर मुस्कान।


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