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Jyoti Jaldewar

Classics

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Jyoti Jaldewar

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मनें मन चोरी मनोमय

मनें मन चोरी मनोमय

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मनें मन चोरी मनोमय धरी । कुंडली आधारी सहस्त्रकारी ॥ १ ॥

मन हें वोगरु आदि हरिहरु । करी पाहुणेरु आदिरूपा ॥ २ ॥

सविया विसरू घेसील पडिभरू । गुरुकृपा विरु विरे सदां ॥ ३ ॥

मुक्ता मुक्तचित्तें गुरुमार्ग विते । पावन त्वरिते भवीं भाव ॥ ४ ॥


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