यात्रा वृतांत - केरल (पदम नाभ स्वामी के दर्शन )
यात्रा वृतांत - केरल (पदम नाभ स्वामी के दर्शन )
जनवरी 14 , 2024 मुझे केरल के त्रिवेंद्रम शहर जाने का मौका मिला l वैसे तो ये पूर्ण रूप से ऑफिसियल भ्रमण थी l इतनी लंबी यात्रा वो भी झारखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए काफी महत्वपूर्ण था l रांची से बैंगलोर और फिर वह से हवाई यात्रा त्रिवेंद्रम मै रात में करींब 10.45 बजे के आस पास होटल शीतल समुन्द्रण पहुंची l यकीन नहीं होगा की पूरे यात्रा की थकान होटल के सुंदर आकर्षक और प्राकृतिक के गोद में बेहद रमणीय था l मैं अपने कमरे में पहुंची तो आश्चर्य कि बहुत कम्फर्ट एण्ड मन को सुकून देने वाली व्यवस्था के साथ खुले दिल से स्वागत किया गया l
अगले दिन की सुबह समुन्द्र की लहरों की आवाज मधुर ध्वनियों की गूंज के साथ कानों को बेहद रोमांचित कर रही थी l मैं अपने करे से बाहर निकल कर देखा तो पाया कि समुन्द्र की लहरों के किनारे ही हमारा कमरा था जो सही में रात में पता नहीं चल पा रहा था l मैं लहरों के किनारे जाकर बैठ गई और वहाँ के लोगों की गतिविधियों को देखने लगी l जैसे कुछ मछुवारे मछली पकड़ने के लिए जाल डाल समुन्द्र की लहरों के साथ आगे बढ़ते जा रहे थे l उसमें से एक उम्रदराज मछुवारा पूरे जोश के साथ अकेला ही समुन्द्र के लहरों में तैरता बहुत आगे निकल गया जो शायद रस्सी को समुन्द्र में बहुत दूर फेकने की मनशा से आगे बढ़ा था और उसके बाकी साथी लोग उसे पीछे से हौसला दे रहे थे l और एक साथ शब्दयान कर रहे था हाइशा, हाइशा .................................................
मैं अपने ऑफिसियल असाइनमेंट के अनुसार एक राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला में भाग लेने पहुंची थी सो नियत समय पर मैं अपने कार्यशाला की आओर चली गई l लगभग शाम के वक्त मैं मन ही मन सोच रही हूँ कि काश ! यहाँ मैं पद्मनाभ स्वामी के दर्शन कर पाती l लेकिन संभावना तो नहीं लग रही थी की मैं जा पाऊँगी l तभी मेरी नजर सामने एक क्यूआर कोड पर पड़ी जिस पर लिखा था की जो भी साइट सीन पर दिए गए समयानुसार जाना चाहते है वो अपना रजिस्ट्रैशन कराए l मैंने registration desk देखा और दूसरे दिन सुबह 3 से 5 बजे तक के स्लॉट में पद्मनाभ स्वामी के दर्शन हेतु रेजिस्ट्रैशन कर दिया l मैंने पाया की मैं पहली प्रतिभागी थी जिसने रेजिस्ट्रैशन किया था चुकी पहले दिन था सभी को विस्तृत जानकारी नहीं ल=मिल पाए थी शायद इसलिए और लोग रेगीस्टरइऑन नहीं किए थे l मैं सोच कुछ लोगों को बताया जाए ताकि एक 5-7 लोगों का ग्रुप बन जाए और हम एक साथ जा सके l
और फिर क्या महाराष्ट्र , छतीसगढ़, मणिपुर , गुजरात, झारखंड और दिल्ली के कुछ प्रतिभागी तैयार हो गए और हम दूसरे दिन सुबह मंदिर जाने के ड्रेस code के अनुसार हम लोग जुगाड़ में लग गए इसका कारण था कि मंदिर में गोल्डन बॉर्डर सारी ऑफ व्हाइट में महिलाओं के लिए और लूँगी ऑफ व्हाइट पुरुषों के लिए ड्रेस कोड है जिसमें ही दर्शन किया जा सकता है l मेरे पास पहली बार इस visit के दौरान साडी नहीं थी और मैं वो केरल साडी खरीदने चली गई l बड़ी मुश्किल से वो साडी मिली लेकिन ब्लाउस की जगह एक टॉप पहन कर मैंने उस ड्रेस कोड को पुर किया l
सुबह 3 बजे सभी तैयार होकर बस में बैठ गए और मंदिर पहुँच गए जहाँ विभागीय पदाधिकारीयों के लिए विशेष पास की व्यवस्था थी l लेकिन वहाँ मकर सक्रांति सप्ताह के क्रम में सबरीमाला से लौटे सभी शरणार्थियों की भारी भीड़ दर्शन के लिए पहुंचे थे l पूरा प्रांगण खचाखच भर हुआ था l सभी कह रहे थे की कोई विशेष या अति विशेष श्रेणी के क्रम में भी अब दर्शन के क्रम में नहीं होगा l सभी सामान्य लाइन में ही लगे रहे l पर संभावना बिल्कुल नहीं दिख रही थी तो सभी ने वापस होने का निर्णय ले लिया l
पर मेरा मन बिना दर्शन किये वापसी के लिए रजामंद नहीं था l मैंने सोचा कि इतनी दूर आकार भी प्रभु दर्शन ना होना ? तो क्या प्रभु तक मेरे आने की खबर नहीं होगी वो मुझे यू ही वापस नहीं भेज सकते l मेरे सहकर्मीगण बस में जाकर बैठ चुके थे पर मेरे कदम वापसी की सीढ़ियाँ बड़ी धीमी गति से उतार रहे थे l तभी सामने में एक बुजुर्ग महिला मिली जिनके हाथ में ठाकुर जी का प्रसाद था केला का पत्ता में -कुछ तुलसी पत्र l जिसे देखकर मेरा मन कह रहा था कि प्रभु ने ये प्रसाद मेरे लिए ही भिवाया है ल मैं बिना कुछ सोचे उनसे निवेदन करने लगी की आंटी आप मुझे दर्शन करवा दीजिए मैं बहुत दूर से आई हूँ l
उन्होंने कहा की तुम 8 बजे पश्चिम द्वार पर आना दर्शन हो जाएगा l एक अजीब स विश्वास जगा जैसे की किसी ने संदेश दिलाया हो कि दर्शन हो जाएगा , फिर आंटी ने अपने हाथ में लिए हुए पूरा प्रसाद को मुझे दे दिया और मुझे मेरे अंतरानुभूति से जोड़कर बता दिया की ठाकुर जी तो मेरे है जिन्होंने मेरी विनती सुन ली l मैं वापस बस में आ गई सभी से अनुरोध करने लगी की हमलोग वापस 8 बजे आएंगे दर्शन के लिए आंटी ने कहा है कि दर्शन हो जाएगा l हमे फिर वापस मंदिर आना चाहिए पर सभी लोग कहने लगे ki नहीं हम लोग किसी बीच पर घूमने चले जाते है l फिर मैंने उन सबको ठाकुर जी का प्रसाद दिया तुलसी पत्र और जादू सा हो गया l सभी एक स्वर में कहने लगे कि ठीक है पास में विघनहर्ता का मंदिर है हम सभी वह दर्शन करने के बाद पुन: वापस आएंगे l
हम सभी 7.30 am पुनः मंदिर परिसर में आए सभी पुरुषों ने फिर से अपने कपड़े बदले लौकर लेकर सभी बैग्स फिर से जमा किया और तभी वह के मुख्य बुजुर्ग पुजारी आए और कहा ग्रामीण विकास मंत्रालय से जो आए है वो मेरे साथ आए दर्शन के लिए , और हम उनके साथ हो लिए -- बड़ी सुखद सी अनुभूति महसूस हो रही थी कि हम पादांनाभ स्वामी के दर्शन कर पाएंगे l
पंडित जी बड़ी शालीनता से पादांनाभ स्वामी की कथा हमे बताई और फिर दर्शन के लिए कैसे अपनी दृष्टि रखनी है की तीनों दरवाजे से प्रभु के दिव्य दर्शन की अनुभूति मिल पाए l पहले दरवाजे से सिर्फ चेहरा /मस्तक व दाहिना हाथ शिवलिंग के ऊपर स्थित देखा जा सकता है l बीच वाले दरवाजे से ठाकुर के नभई कमल में कमाल पर विराजमान ब्रह्म जी के दर्शन किया जा सकता है जबकि तीसरे दरवाजे से प्रभु के चरण कमाल के दर्शन मिलेंगे l
अति सुंदर , अद्भुत , शांत जैसे वैकुंड धाम में अनंत शयन /ध्यान में लीन ठाकुर जी महाराज /वसुदेवाए पद्मनाभ स्वामी के दर्शन का लाभ पाकर धनी हुए हम सब और अश्रु जल से अपने अनर्मन को अभिभूत महसूसू किया l
"ॐ नमो भगवते वासूदेवाय"
संस्मरण - यात्रा पद्मनाभ स्वामी जी
मिनाक्षी प्रकाश
