आदियोगी शिव प्रतिमा,- दर्शन तमिलनाडु (कोयंबटोर)
आदियोगी शिव प्रतिमा,- दर्शन तमिलनाडु (कोयंबटोर)
कभी कभी आप एक ऐसी यात्रा पर अनायास ही निकल पड़ते है l जिसकी ना आपने कभी योजना बनाई , ना कल्पना की, ना कोई जानकारी ही आपके पास होती है l कुछ ऐसा ही संजोग मेरे साथ भी घटित हुआ l जब हमारे ऑफिस के एक कार्यक्रम में प्रतिभाग करने हेतु मुझे कोयंबटोर - तमिलनाडु जाने का अवसर प्राप्त हुआ l 7 जुलाई 2022 रांची से मैं अपने दो पुरुष सहकर्मी के साथ फ्लाइट से रांची से हैदराबाद और वहाँ से connecting फ्लाइट लेकर कोयंबटोर पहुंची l वहाँ मुझे 8 & 9 जुलाई को एक विशेष कार्यक्रम cxo conclave और Alumni meet में भाग लेना था l लेकिन जैसे ही मैं एयरपोर्ट से बाहर निकली मैंने आदियोगी की बड़ी सी होर्डिंग देखा l
मैं सोचने लगी कि अरे ये तो आदि योगी का स्थान,
और
मैं सोचने लगी अपनी तीव्र इच्छा के साथ की कैसे ?
मैं आपके दर्शन कर पाऊँगी महादेव ,
चुकि मैं किसी ऑफिस के कार्यक्रम में थी तो शायद समयाभाव जाना हो पाएगा या नहीं .।
कितनी दूर है , जाना हो पाएगा कि नहीं
होटल पहुँच गई पर मन अभी भी जुगाड़ में लगा था l जब मैं बाकी सकर्मियों से मिली तो पता चला कि सभी ने दर्शन कर लिए है
अब मैं जाऊ कैसे ? और किसके साथ
अगले दिन CXO Conclave के समाप्त होने पर और alumni meet की तैयारी के दौरान मैंने पाया की मेरे एक सहकर्मी को भी जाने की इच्छा है और वो अभी तक नहीं गए है l बस मुझे तो संग मिल गया और अगलें सुबह 5 बजे हम लोग आदि योगी के दर्शन के लिए निकाल पड़े' l हल्की बारिश और पूरा रास्ता हरियाली ही हरियाली बहुत सूदर नजारा .। मेरा हर्ष, मेरी आस्था जैसे अंतर्मन से भोलेनाथ की आभारी हो रही थी .। शुक्रिया प्रभु, अपने दरबार में बुलाने के लिए --अपने दर्शन कराने के लिए रास्ता बनने के लिए .
आदियोगी के दरबार पहुँच कर तो सचमुच असंभव को संभव बनने वाले महादेव के चरणों में नतमस्तक हुई l इस अहसास को भी समझ पाया की हमारा महादेव पर विश्वास और हमारी इच्छाशक्ति ही हमे अपनी मंजिल तक पहुंचा सकती है l वह का वातावरण शुद्ध, शांत और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण है l इस अहसास को शब्दों में पिरोना थोड़ा मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है l जब भी मौका मिले तो एक बार जरूर आदियोगी होकर आइए l
वहाँ का चंद्रा कुंड जहां सिर्फ पुरुष स्नान कर ध्यानलिङ्गं में जाते है फिर सूरजकुंड जहां महिलायें गेरुआ वस्त्र धारण कर दर्शन के लिए जाती है l योगिनी देवी का मंदिर जो साक्षत माँ -शक्ति स्वरूप की उपस्थिति का अभ्यास करती है l मन नहीं करता की वहाँ से उठा जाए जो आप वहाँ ध्यान में बैठ जाते है जब .. " जब मैं सूरज कुंड से गुजर रही थी तो मेरे मन में आया की मैं भी स्नान कर लू पर कपड़े नहीं थे और आगे की प्रक्रिया में समय लग सकता था l पर मेरे सहकर्मी ने बड़ी भावुकता से कहा की मैडम आप जाना चाहती है तो जाए मैं बाहर आपका इंतेजार करता हु, करण की जब कोई इच्छा यहाँ आने के बाद हुई है तो उसे पूरा कर लेना चाहिए" मैं तुरंत टिकट लेकर अंदर स्नान घर की ओर दौड़ी फिर वहाँ से सूरजकुंड आई और महादेव के दर्शन सूरजकुंड के बीचोंबीच किया जहां भक्ति पूर्ण परिक्रमा कुछ सनातनी बहने जल के अंदर ही कर रही थी l अद्भुत दृश्य जो हमारी आस्था के प्रवाह को और भी सरोवोर कर रहा था l
वहाँ से बाहर आकर हमलोग ध्यानलिङ्गं की तरफ गए जहां अद्भुत शांति, सकारात्मक ऊर्जा तरंगों को महसूस किया l
वापसी में हमने प्रसाद , आदियोगी प्रतिमा और रुद्रारकक्ष का करे किया l पूरी यात्रा अत्यधिक सुखद और सुंदर थी जिसे भुलाये नहू भूल जा सकता l
"श्री शिवाय नमस्तुभयं "
मीनाक्षी प्रकाश
आदियोगी शिव प्रतिमा, शंकर की ११२ फ़ीट की ऊँची प्रतिमा है जो कोयम्बटूर में वर्ष २०१७ में स्थापित की गयी थी। इसकी अभिकल्पना (डिजाइन) सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने की है। सद्गुरु का विचार है कि यह प्रतिमा योग के प्रति लोगों में प्रेरणा जगाने के लिये हैं, इसीलिये इसका नाम 'आदियोगी' (=प्रथम योगी) है। शिव को योग का प्रवर्तक माना जाता है।
आदियोगी शिव ईशा योग परिसर में स्थित है, जो पश्चिमी घाटों की एक श्रृंखला, वेल्लियन्गिरि पर्वत की तलहटी में तमिलनाडु के कोयम्बटूर में ध्यानलिंग पर स्थित है। प्रतिमा को दो साल और आठ महीने में तैयार किया गया था। प्रतिमा की ऊंचाई, 112 फीट (34 मीटर), सद्गुरु ने यह भी कहा कि ऊंचाई मानव तंत्र में 112 चक्रों का प्रतिनिधित्व करती है।[1]
