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व्यवसाय

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शादी को 15 साल बीत गये थे और पूर्वी अब तक तीन बच्चों की माँ बन चुकी थी । चाहती थी कि अब परिवार नियोजन अपनाकर इस पर अब विराम लगा दे । लेकिन उसके मन में ऑपरेशन को ले कर बहुत डर था, इसलिए वो इसे टालती गई ।

अचानक एक दिन उसको पता चला कि वो वापस माँ बनने वाली है , वो बहुत घबरा गई की ये बात कैसे अपने पति को बोलेगी और इसमे उनकी क्या प्रतिक्रिया रहेगी ? पर अपने आप को संभालते हुए पति को उसने ये बात बताई तो पति भड़क गये और बोले सारी तुम्हारी गलती है,पहले ही हमारे तीन बच्चे हैं ,उनके पढ़ाई का ख़र्चा, खाने पीने की ख़र्चा और उसके ऊपर से तुम ये नया बवाल ले कर खड़ी हो गई ? अपनी आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए वो पूर्वी को बच्चा गिराने को बोला और पूर्वी भी हामी भरी दी ।बहुत ही घबराहट और बेचैनी के साथ दोनो डॉक्टर के पास चल पड़े।

डॉक्टर साहिबा मरीज़ देख रहीं थी । पूर्वी मन ही मन सोच रही थी की काश ! वो उसको एक बार बोल दें, कि बहुत देर हो चुकी है अब सम्भव नही है, आप इसे दुनिया मे आने दीजिए । पर भगवान को शायद कुछ और ही मंजूर था , डाक्टर मैडम बोली कि आप हॉस्पिटल में दाखिल हो जाइये, हम बच्चा भी गिरा देंगे और परिवार नियोजन भी कर देंगे । हिसाब से लगभग चालिस हज़ार रुपयेे ख़र्चा आएगा , ये सुनते ही पूर्वी की मानो दिल ही टूट गया, वो सोचने लगी आजकल भावनाओं का और मातृत्य का अंत ही हो चुका है । खर्चा सुनते ही उसके पति बोले दूसरे डॉक्टर के पास चलते हैं । पूर्वी रास्ते भर यही सोच रही थी कि तीन बच्चों की माँ हो कर एक और कि हत्या कैसे कर दे ? सोचते सोचते एक और डॉक्टर की क्लिनिक में वो कब पहुंच गयी पता ही नही चला।दूसरी डॉक्टर बहुत जानीमानी बुजुर्ग महिला डाक्टर थीं । उन्हें देखते ही पूर्वी के मन में उम्मीद की किरण जागी की काश ! वो उसे उसकी गलती के लिए डांट ही दे और बोले कि बच्चे को आने दो इस दुनिया में , लेकिन जैसे ही वो बोली ये दवाई ले लो इससे तुम्हारा गर्भपात 3 दिन में हो जाएगा ।पूर्वी के तो पसीने छूट गये । एक कठपुतली की तरह हर एक माध्यम से वो गुजरी और ये सोचती रही कि जिन डॉक्टर को हम भगवान मानते हैं वो अब डाक्टरीे पेशे को व्यवसाय बना लिए हैं ,और एक पल के लिये भी उसके पति ने उसकी सेहत के बारे में नही सोचा । हर कोई एक सधे हुए व्यापारी की तरह अपने काम में नफा-नुकसान देखता है । सारी प्रक्रिया से गुज़रते समय जो दर्द पूर्वी महसूस कर रही थी वो सच में बहुत असहनीय था । अपने ही बच्चे को अपने हाथों से मार डाला ।

न्यूटन का तीसरा नियम केवल फिजिक्स में नही बल्कि असल जीवन मे भी लागू होता है , ये उसे तब पता चला जब एक छोटी सी जान की हत्या के बाद, उसी दर्द से पूर्वी को भी दो दिन तक गुजरना पड़ा । शरीर का वो दर्द तो चला गया पर जीवन भर पूर्वी को पश्चा्ताप की आग में झुलसने के लिए छोड़ गया ।

इस सब में अगर ग़ुस्सा आता था तो दोनों डॉक्टरों के ऊपर जिनको हम इंसान भगवान मानते हैं ,वो हमारे जीवन को अपना व्यवसाय बना चुके हैं ।

फिर भी पूर्वी क्यों दुखी है,सारी गलती तो उसके पति और डॉक्टर की थी । अरे नही ! इस सब मैं वो ये भी भूल गई की डॉक्टर तो भगवान होता है,लेकिन "माँ", माँ तो भगवान से बढ़कर होती है,पूर्वी चाहती तो उसके बच्चे को उससे कोई नही छीन सकता था, लेकिन इस व्यवसायिक दुनिया में, खाने का खर्चा, कपड़े का खर्चा, पढ़ने का खर्चा और शादी का खर्चा, इन सब में से एक माँ भी कब एक व्यापारी बन गई पता ही नही चला ।

फायदे, नुकसान की इस दुनिया में, एक नन्ही सी जान चल बैठी।


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