Meenakshi Bhardwaj

Romance


4.0  

Meenakshi Bhardwaj

Romance


वो बारिश का प्यार

वो बारिश का प्यार

12 mins 32 12 mins 32

आज वर्षो बाद मेघना को देखा, देखते ही पुरानी यादें ताज़ा हो गई.... 

हम दोनों साथ तो पढ़ते ही थे लेकिन अच्छे पड़ोसी भी थे और दोस्त भी, बचपन से एक दूसरे को जानते थे, साथ खेलना, लड़ना, पढ़ना हो या बारिश मे भीगना। 

शायद वो अपने नाम के अनुकूल ही थी जैसे ही बारिश होती झट से छत पर जाकर मुझे आवाजे लगा देती थी.. ईशान जल्दी आओ, बारिश शुरू हो गयी है और मैं बारिश मे भीगने से ज्यादा उसके मासूम से चेहरे और उस अल्हड़ पन को देखने के लिए चला जाता, उसकी इसी मासूमियत पर दिल जो हारे हुआ था, मैं बचपन से उसे पसंद करता था पर जवानी की देहलीज पर आते आते वो कब मेरा इश्क़ हो गयी मुझे पता ही नही चला, बस डरता था अगर उससे इज़हार कर दूँगा तो शायद वो मेरी दोस्त भी नही रहेगी, उसको खोने के डर से मैं उसको आज तक इज़हार नही कर पाया की मैं उस से बेपनाह इश्क़ करता हूँ।

ज़ब भी बारिश होती एक भी मौका नही गँवाती थी बारिश मे नहाने का, और एक अजीब आदत भी थी उसकी बारिश मे स्कूटी उठाती और ईशान बाहर निकल तुझे लॉन्ग ड्राइव लेकर चलती हूँ मुझे हंसी आती उसकी हरकतों पर और बहुत प्यार भी बस जताने से डर लगता था, लॉन्ग ड्राइव लेकर सीधा आइसक्रीम पार्लर लेकर जाती मुझे..

पागल थी पूरी, जो तेज बारिश मे भी चाय की जगह आइसक्रीम खाने निकलती थी लॉन्ग ड्राइव पर, मुझे भी खुद जी अजीब सी हरकतो मे शामिल कर लिया करती थी, इसलिए में उसे बारिश में भीगी और ड्राइव पर जाने पर भगा ले जाने के कारण भीगी भागी लड़की ही कहता था, और घर आते ही माँ की डांट से बचने के लिए मुझ पर नाम लगा देती थी की ईशान को बाहर जाने का मन था पर उसकी मम्मी मेरी ओर इशारा करके कह देती थी की मुझे सब पता है।

सब जानते थे उसके बचपने को, पर उसकी नादानियाँ और बच्चों जैसी हरकतों से ही तो घर, घर जैसा लगता था। उदासी को तो अपने पास तक नही आने देती थी, और दूसरा अगर उदास हो तो उसे कैसे ख़ुश करके चेहरे पर मुस्कान लाना है ये हुनर भी बड़ा अच्छे से जानती थी। 

बहुत प्यारी थी मेरी मेघा, और आज अचानक से जब मैंने पांच साल बाद उसे देखा तो बिल्कुल अलग सी दिखाई दी मुझे, बहुत शांत, गंभीर और चेहरे से मुस्कान तो कोसों दूर हो जैसे आखिर ऐसा क्या हुआ जो सबको हँसाती थी वही लड़की हँसना भूल सी गयी थी। अब तो मुझे जानना था की आखिर क्या हुआ उसके साथ.... आखिर उसकी उदासी के लिए में उसे छोड़ कर थोड़ी गया था, अपनी वजह से कभी उसको तकलीफ़ मे नही देखना चाहता था इसीलिए ही लंदन से आयी नौकरी का ऑफर एक्सेप्ट कर के चला गया उसके जीवन से दूर...

दरअसल बात उन दिनों की है जब मैंने और मेघना ने कॉलेज मे एक साथ दाखिला लिया, मुझे मेघना से बचपन से प्यार था बस इज़हार करने की कभी हिम्मत नही हुई और दिमाग मे एक ख्याल ये भी था की पहले किसी काबिल बन जाऊँगा उसके बाद मेघना से इज़हार करके सीधा शादी का प्रस्ताव ही रख दूंगा ताकि मैं हमेशा के लिए उसे अपना बना लूंगा पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था मेघना कॉलेज मे हमारा एक साथी समीर को चाहने लग गई थी और मुझे आकर सब बताती थी, मैं उसकी खुशी देख कर कभी उससे अपने दिल की बात नही बता पाया और अब यहीं सोचता था की मेघना समीर के साथ ख़ुश रहेगी क्यूंकि वो उसका प्यार है और मुझे इनके बीच नही आना चाहिए। 

लंदन से नौकरी का ऑफर मिलने के बाद मैंने जल्दी से उस ऑफर के लिए हाँ कर दिया क्यूंकि मुझे जल्दी से जल्दी जाना था क्यूंकि यहाँ रह कर बिना मेघना मेरा जीवन कटना मुश्किल था, आखिर बचपन से लेकर आज तक किसी और लड़की के बारे मे सोचा ही नही था.. मैं उन यादो से दूर जाना चाहता था, लेकिन एक सोच यहीं पर भी ठहर गई थी की अब जिंदगी मे मेघा के अलावा किसी को अपने दिल की मालकिन नहीं बनाना है। 

एक साल तक तो मेघना के बारे मे अपने मम्मी डेड्डी से पूछ लिया करता था, फिर साल भर बाद मैंने मम्मी डेड्डी को भी लंदन ही बुला लिया, अब हम वही रहते थे तो मेघना और उसके परिवार की कोई खबर ही नही थी और मैं भी अपने काम मे इतना व्यस्त हो गया की मेघना को सोने से पहले उसकी तस्वीर देख कर याद तो कर लेता था पर कभी उसकी खबर नही ली, मुझे लगता था अब उसने शादी कर ली होंगी और अपने जीवन मे ख़ुश होगी तो मेरा उनके बीच जाना सही नही होगा, यही सोच लेकर कैसे पांच साल निकले पता ही नही चला, आखिर मेरा भी भारत आने का मन था पर अब कोई वजह नही थी आने की.. पर हमारे कॉलेज के दोस्त प्रिया और राहुल शादी करने जा रहे थे तो उन्होंने मुझे शादी मे बुलाया तो मुझे बहाना मिल गया भारत आने और मुझे पता था की उस शादी मे मेघना भी जरुर आयेगी तो उसे देखने,,ये दोनों बहाने मिल गए थे मुझे वतन आने के लिए... 

प्रिया और राहुल की शादी के बहाने से मैं एक महीने की छुट्टीयाँ लेकर आया था, मम्मी डैडी का मन भी था आने को, लम्बे समय से वो भी परिवार और रिश्तेदारों से नही मिल पा रहे थे तो उन्होंने भी मेरे साथ आने का मन बना लिया। 

हम घर को रेंट पर देकर गए थे इसलिए रहने की दिक्कत तो थी नही,, जैसे ही हम घर पहुंचे, मेघना की मम्मी को पता चलते ही हमारे लिए खाना लेकर पहुंच गयी, और कह गयी कोई भी जरुरत हो तो बिना झिझक पहले जैसे बता दीजियेगा, मैं उसी समय आंटी से मेघना के लिए पूछने वाला था पर शायद उस समय वो वक्त सही नही लगा मुझे और ये भी था की शादी मे मिल जाएगी।


जैसे ही मैं तैयार हो शादी मे पहुँचा मुझे मेघना दिखाई दी और वो भी अकेले, मुझे लगा समीर किसी काम से बाहर होगा तभी साथ नही है नही तो वो मेघना को एक पल के लिए भी अकेला नही छोड़ सकता है, मैंने हिम्मत की और मेघना के पास गया, जैसे खो सी गयी थी मेरी मेघा..... 

मैं कुछ कहता उससे पहले उसी ने मुझे कह दिया, क्यों ईशान इतने दिनों में एक बार भी अपनी सबसे अच्छी दोस्त की याद नही आयी तुम्हें.... बिना मिले चले जाना और पांच साल में एक बार भी यह जानना की तुम्हारी दोस्त कैसी है, मन नही हुआ तुम्हारा... ज़ब मुझे सबसे ज्यादा तुम्हारे साथ की जरूरत थी और तुम नही थे, कह कर मेघना मेरे गले लग कर जोर जोर से रोने लग गयी और मैं कुछ पूछता उससे पहले वो बेहोश हो गयी थी।

मैं जल्दी से उसे अस्पताल लेकर गया और आंटी अंकल को फ़ोन किया। मेघना को ऐसा क्या हुआ जो वो इतनी उदास थी, का कारण पूछा, तो अंकल आंटी ने बताया की समीर अब इस दुनिया मे नही है शादी के बाद ज़ब हनीमून से लौट रहे थे तो रास्ते मे भयंकर बारिश हुई और कार का बैलेंस बिगड़ जाने से समीर और मेघना का एक्सीडेंट हो गया और समीर ने अस्पताल लाने से पहले ही दम तोड़ दिया तब से मेघना ने अपने आप को उसकी यादों में ही कैद कर लिया है और जिसे बारिश के आने से पहले बारिश का इंतज़ार होता था आज वही बारिश को देखते ही डर जाती है जैसे बारिश उसका सब कुछ छीन कर अपने साथ बहा ले गयी हो...

अब ईशान को खुद पर गुस्सा आ रहा था की आखिर वो मेघना को इतना चाहता था तो कभी उसकी खबर क्यों नही ली, क्यूँ उससे दूर रहा ज़ब उसे उसकी सबसे ज्यादा जरुरत थी.... अब ईशान ने ठान लिया वो अपनी मेघा को पहले जैसी मेघा बना कर ही रहेगा और हमेशा के लिए उसका हाथ थाम लेगा, अब वो किसी भी हालत में उसकी खुशियाँ लाकर ही रहेगा। 

मेघना को होश आ चुका था, ईशान ने उसे बोलने को मना किया और आराम करने को कहा, उसने मेघना को बता दिया की अंकल आंटी ने उसे सब बता दिया है... मेघना को अस्पताल से छुट्टी मिल गयी थी डॉक्टर ने मेघना को जितना खुश रख सको रखने की हिदायत दी और कहा की मानसिक स्वस्थ रखने के लिए इसे थोड़े दिन कही बाहर हिल स्टेशन ले जाओ ताकि ये मानसिक रूप से जल्दी स्वस्थ हो सके... अंकल आंटी, मम्मी डेड्डी और मैंने मेघना को लेकर मनाली जाने का मन बना लिया पहले तो मेघना ने मना किया पर आखिर में मैंने उसे कुछ दिनों बाद लंदन चला जाऊंगा का हवाला देकर मना ही लिया.... 

मुझे पता था मेघना को इतनी जल्दी मैं समीर के ग़म से बाहर नही निकाल पाऊंगा मगर फिर भी किसी शायर ने खूब कहा है की... महबूब की हर चीज महबूब ही होती है.. ज़ब तक महबूब के सुख के अलावा उसके दुःख भी अपने ना लगे वो मुहब्बत क्या खाक मुहब्बत होती है.. यहीं सोच कर इसी ट्रिप में मेघना को प्रोपोज़ करने का ठान चुका था ताकि उसे वो सब ख़ुशियाँ दे पाऊं जिसके लिए मेरी मेघा बनी थी। 

आखिर हम मनाली पहुंच चुके थे, बहुत सुहावना मौसम था और वहां के प्राकृतिक नज़ारे, मानो धरती का अम्बर से मिलन अपनी चर्म सीमा पर है वो आस पास बर्फीले पहाड़, आस पास हरियाली, और उस पर कभी ठंडी का मौसम तो कभी अचानक आयी बरसात, बहुत अद्भुत नजारा था। 

बारिश के आने पर मैंने मेघना को उसके कमरे में जाकर आवाज लगाई जैसे सालो पहले वो मुझे लगाती थी।

वो बाहर निकल कर आयी और मैं उसका हाथ पकड़ सीधा बारिश में ले गया, कुछ देर के लिए वो भी बीती बातें भूल कर बारिश का मजा ले रही थी, अंकल आंटी दूर से देख खुश हो रहे थे की हमारी बच्ची फिर से सालो बाद खुश दिखाई दे रही है... मैंने तभी उसको आइसक्रीम लाके दी, मैंने और उसने आइसक्रीम खाते खाते पैदल ही बारिश में घूमने का मन बना लिया, मेघना और मैं पुरानी बातें याद कर कर के हँस रहे थे उतने मैं मैंने मेघना को प्रपोज़ कर दिया, इस बार मैं मेघना को बताये बिना नही जा सकता था फिर चाहे उसका जो भी फैसला हो.... नही तो शायद सब कुछ जिंदगी मे पा लेने के बाद भी अधूरा ही महसूस करता खुद को.... मेघना मेरी मुँह से निकले शब्दों को सुनकर स्तब्ध हो गयी और मुझे होटल चलने को कहा.... मुझे समझ नही आ रहा था की मेघना से माफ़ी मांगू या उसे कह दू की मुझे उसके साथ पूरी जिंदगी साथ चलना है...

दूसरे दिन हम वापस दिल्ली जा रहे थे, मैंने अंकल आंटी से मेघना को लेकर शादी का प्रस्ताव रख दिया था वो खुश थे पर उनका यहीं कहना था की मेघना अगर ख़ुश हो तो हमें कोई आपत्ति नही है... 

दो दिन तक मेघा ने मुझसे बात नही की और मैंने भी जान बुझ कर उससे बात नही की क्यूंकि मैं उसे अकेले मे थोड़ा सोचने देना चाहता था...

मेघा की ओर से कोई जवाब नही आता देख मैंने उसे एक पत्र लिखा, क्यूंकि दूसरे दिन मेरे लंदन की फ्लाइट थी ओर जाते जाते मैं उसका हाँ या ना मैं जवाब सुनना चाहता था। 

मैंने आंटी के हाथों मेघना के पास लेटर पंहुचा दिया था, रात हो चुकी था। 

मेघा को उसकी माँ ने लेटर थमाते हुए कहा बेटा जो भी फैसला लो सोच कर लेना, ईशान जैसे लड़के हर किसी की किस्मत मे नही होते है किसी की पसंद बनना प्यार नही बल्कि पूरी जिंदगी वही पसंद बनी रहे वो प्यार है और ईशान उन्ही लड़कों मे से है जिसने बस तुम्ही को प्यार किया है... आगे जिंदगी बहुत बड़ी है और ईशान जैसा हमसफ़र साथ होगा तो तुम्हारी जिंदगी संवर जायेगी, वो सब जानते हुए भी तुम्हें अपनाना चाहता है तो उसके प्रेम की क्या हद होंगी वो तुम सोच लो... इतना कहकर माथे पर प्यार भरा हाथ फेरकर वो चली गयी, मेघना ने खत खोला खत मे लिखा था...

मेरी प्यारी मेघा,, 

           बचपन से लेकर आज तक मैंने किसी लड़की को बेइंतहा चाहा है तो वो बस तुम और सिर्फ तुम हो, ये सच है मैंने तुम्हें कभी इज़हार नही किया क्यूंकि मुझे ये डर था की अगर तुम्हें बुरा लगेगा तो मैं अपने बचपन के दोस्त को खो ना दूं और तुमसे बिना इजहार तो जी लेता पर तुम्हारी नाराजगी से तो चैन से मर भी नही पाता, अगर इश्क़ इबादत है तो में सिर्फ तुम्हारी इबादत करता हूँ... कई बार मैंने तुम्हें अपने दिल की बात कहना चाही लेकिन हिम्मत नही कर पाया, क्यूंकि एक जिम्मेदार इंसान बन कर तुम्हें वो सारी खुशियाँ देना चाहता था जिसके लिए तुम बनी हो, और जब वो वक्त आया मैं तुम्हें कुछ कहता उससे पहले तुमने समीर और तुम्हारे रिश्ते की बात मुझे बताई, फिर तो तुम्हारी खुशियों के लिए मुझे पीछे हटना ही था..

लंदन जाने का मेरा फैसला ही तुम दोनों की जिंदगी से चले जाना था, मैं चाहता था मेरी मेघा अपने प्यार के साथ अपना सफर तय करें और मैं तुम दोनों के बीच न आऊं, समीर के जाने का तुमसे ज्यादा दुःख है मुझे, क्यूंकि वो मेरा दोस्त तो था ही पर मेरी जिंदगी की जिंदगी भी था, तो पर होनी को तो कोई टाल नही सकता है....

आज अगर तुमसे इजहार नही करता तो शायद मैं कभी अपने आप को माफ़ नही कर पाता मेघा, क्यूंकि जिसने हमेशा तुम्हारी मुस्कान के अलावा कुछ माँगा ही नही रब से वो तुम्हें इस हाल मे छोड़ कर कैसे चला जाता... अब तुम्हारे हाथ मे है तुम अगर चाहोगी तो मैं जिंदगी के हर मोड़ पर तुम्हारे साथ चलना चाहता हूँ नहीं तो हमारी दोस्ती तो है और रहेंगी.... पर हाँ मैं कभी शादी नही करूँगा, शायद इसी आस मे की उम्र के किसी भी मोड़ मे तुम्हारा हाँ का जवाब आ जाए, इसी उम्मीद मे इस ईशान को सुकून से मर जाना है... 

सुबह एयरपोर्ट जाने से पहले कॉल कर देना हां या ना का, क्यूंकि तुम्हें देखने के बाद शायद खुद को जाने के लिए संभाल नही पाऊं... तुम्हारा हाँ या ना जो भी जवाब हो यकीन मानना मुझे बुरा नही लगेगा आखिर महबूब की हर चीज महबूब होती है, तुम्हारा हां या ना सब मेरे लिए महबूब है..... 

          तुम्हारा ईशान....

खत पढ़ते पढ़ते मेघा के आँसू नही थम रहे थे और पूरी रात्रि सोचते सोचते कब आँख लगी पता ही नही चला, ईशान कॉल का इंतज़ार करके रवाना हो चुका था... तेज बारिश थी, अचानक मेघना की आँख खुली उसने देखा ईशान जा चुका है, उसने जल्दी से कार निकाली और एयरपोर्ट पहुंची, एयरपोर्ट पहुंचते ही उसे ईशान और उसके माता पिता दिख गए थे मेघा ने एयरपोर्ट से उतरते ही आइसक्रीम पार्लर जो वही था से आइसक्रीम खरीदी और ईशान को जोर से आवाज लगाई,, ईशान लॉन्ग ड्राइव चलोगे मेरे साथ, ये भीगी भागी लड़की तुम्हें भागने आई है हमेशा के लिए और इतना सुनते ही ईशान दौड़ कर भागा और मेघना को गले लगा लिया, ईशान के मम्मी पापा भी खुश थे और वो ईशान को वही छोड़कर लंदन के लिए रवाना हो गए और कहकर गए की बहू को लाने की तैयारी करने जा रहे है... ईशान और मेघना बारिश मे आइसक्रीम खा रहे थे और एक दूसरे को पा कर खुशी से बारिश आँखों मे भी बह रही थी.... 

आखिर ये मानसून इन दोनों की जिंदगी मे एक नयी शुरुआत ला चुका था....  

         



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