*वेलेंटाइन डे*.......
*वेलेंटाइन डे*.......
सुमन, एक अच्छे दिल की, एक सरल और बहुत ही गुणी स्वभाव की थीं। जैसा नाम वैसे ही अच्छे मन की थी । दो बच्चे , सास -ससुर, पति-पत्नी, सभी एक परिवार में एक साथ रहते थे।, सुमन,सभी काम दिल से करनेवाली, परीवार के सुख के बारे में सोचने वाली एक सीधी साधी फैमिली के बारे में सोचने वाली थी।
जब शादी हो गई थी तो सोचती थी, आगे पढ़ाई कंप्लीट कर के, कहीं और जॉब करू, और फैमिली को अर्थिक हेल्प कर दूँ
लेकिन घरेलू कामकाज में हो न सका। उसकी तमन्ना अधूरी रह गई।
अब एक आदर्श गृहिणी के रूप में, खुदको ढालने लगी। अपना संसार की गाड़ी खुबिसे चलाना, बस अब उसका यहीं सपना था।
आज उसका जन्मदिन था। जतिन ने सुबह ही उसको विश किया, जन्मदिन की बधाई दी। और पूछा आपको क्या चाहिए, वही चीज में लाके दूंगा। सास ससुर ने भी जन्मदिन की बधाई दी। बच्चों ने भी जन्मदिन की हार्दिक बधाई दी। सुमन, ,घर में सब की लाडली बहू, पत्नी और मां थी। उस दिन घर का माहौल बड़ा प्रसन्न था। बच्चो ने स्कूल जाते वक्त प्रॉमिस किया था कि स्कूल से लौटने के बाद जन्मदिन बड़ी धूम धाम से मनाएंगे।
आर्थिक परिस्थिति इतनी अच्छी न होने के कारण, जेमतेम होने के कारण सुमन को हमेशा लगता था मै कुछ भी हेल्प नहीं कर सकती।
सुमन ने जतिन से कहा आज मेरा जन्मदिन है, इसीलिए मुझे आपसे एक अलग गिफ्ट चाहिए।
सुमन ने अपने पति से आग्रह किया कि वह उसकी कम से कम तीन कमियां बताए जिन्हें सुधारकर वह अधिक अच्छी बीवी बन जाए। में गुस्सा नहीं करूंगी बल्कि सुधारना करूंगी। मुझे सच बताना। जतिन ये बात सुनकर हैरान रह गया। और असमंजस की स्थिति में पड़ गया। लेकिन जतिन ने सोचा, मै इसकी कमियां बता दूँ तो भविष्य में मेरी भी कुछ कमियां इससे ज्यादा हो सकती है। ये सिलसिला जारी रहेगा। जिसमे मुझे सुधार की जरूरत थी।
जतिन ने कहा ठीक है। मुझे इस बारे में सोचने का वक्त दे दो मै इसका जबाब दे दूंगा। और जतिन ऑफिस चला गया।
जतिन दोपहर तक ऑफिस में सोचता रहा। तब तक टिफिन टाइम हो चुका था। जतिन ऑफिस के नजदीक एक फूलों की दुकान में गया। निशिगंध के फूलोंका एक खूबसूरत गुलदस्ता चुना। एक खत लिखा और गुलदस्तेमें रख दिया। खत में लिखा था..............
*"जन्मदिन की लाख लाख हार्दिक शुभकामनाएं। मुझे नहीं पता कि आप में क्या कमी है, और में जानना भी नहीं चाहता।लेकिन में आपको बहुत चाहता हूं, आप मेरी पसंद हो, में आपसे बहुत प्यार करता हूं।"*
सात बजे जब जतिन ऑफिस से घर आया तो उसने देखा सुमन दरवाजे पर खड़ी उसका इंतजार कर रही है। जैसे ही उसने जतिन को देखा उसके आंखों से प्यार के आंसू बह निकले। उन दोनों में जो प्यार था उसकी मिठास और बढ़ गई थी।
यह कहने की जरूरत नहीं कि उनके जीवन की मिठास कुछ और बढ़ गई थी।
इसीलिए यथा संभव जीवन में सराहना करने में कंजूसी ना करेंऔरआलोचना से बचकर रहने मै ही समझदारी है।
पती इस बात पर बहुत खुश था कि पत्नी की आग्रह के बावजूद उसने उसकी तीन कमियां नहीं बताई
किसीके दुर्गुण के अलावा गुण देखने चाहिए।सद्गुणों की स्तुति करनी चाहिए। इससे प्यार और बढ़ता है। अपने प्रिय व्यक्ति के साथ बहस करने के अलावा हार माननी चाहिए, इससे निश्चित रूप से प्यार की भावना बढ़ जाती है। इस तरह छोटे बड़े जीवन के प्रसंग मे प्रेम व्यक्त करना चाहिए। इसे ही सच्चा वेलेंटाइन डे कहते हैं। एक विशिष्ट दिन को वेलेंटाइन डे मनानेकी जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
