"उसकी आँखों में मेरा नाम था"
"उसकी आँखों में मेरा नाम था"
"उसकी आँखों में मेरा नाम था"
मैं उन लड़कों में से था जो भीड़ में भी अकेले रहते हैं। कॉलेज के पहले दिन मैं सबसे आख़िरी सीट पर बैठा — चुपचाप, जैसे हमेशा से करता आया हूँ।
तभी वो आई — खुले बाल, गहरी आँखें, और आवाज़ जैसे मीठी बारिश। उसका नाम था "रिया"।
वो अक्सर मुझे देखती थी — सीधे मेरी आँखों में। मैं सोचता था शायद मुझे भ्रम हो रहा है, लेकिन उसकी मुस्कान हर बार कुछ और कहती थी।
एक दिन लाइब्रेरी में हमारी नज़रें टकराईं। उसने खुद आकर पूछा, “तू हमेशा इतना चुप क्यों रहता है?”
मैंने मुस्कुराकर जवाब दिया, “पता नहीं, शायद बोलने से ज़्यादा महसूस करना आता है।”
उस दिन से हमारी दोस्ती शुरू हुई — क्लास के बाद कैंटीन, ग्रुप स्टडी, फिर देर रात की चैट्स। लेकिन मैंने कभी उसे बताया नहीं कि मैं उसे कितना चाहता हूँ।
फाइनल ईयर का आख़िरी दिन था। सबने ग्रुप फोटो लिए, सब कुछ नॉर्मल था — लेकिन मैं जानता था, अब शायद कभी ना मिलें।
वो मेरे पास आई, हाथ में एक डायरी थी।
उसने कहा, “तेरे जैसी शांति बहुत कम लोगों में होती है... मैं हमेशा तुझे याद रखूँगी।”
मैं कुछ नहीं कह सका... बस उसकी आँखों में देखा — और यकीन मानो, **उसकी आँखों में मेरा नाम था।**
— The End —

