STORYMIRROR

Kushal Singhal

Abstract Inspirational

4  

Kushal Singhal

Abstract Inspirational

ठहराव और बदलाव

ठहराव और बदलाव

2 mins
288

आज काफ़ी लोगों से बात हुई मेरी

बात ही बात में पता चला कि उन सब ने मुझे खुद से काफी जुदा पाया

एक बड़े अरसे से हाल नहीं पूछा था मैंने उनका,

एक वक्त से याद तक नहीं किया था मैंने उन्हें,


आज एक अंजान खत से बात हुई मेरी,

हाँ जी जनता हूँ, बचपन का एक हिस्सा था

एक सुलेख की किताब थी और हर पन्ने में नया ही किस्सा था

कुछ रंगों से भरी डब्बी थी, और उतने ही रंग के ख़्वाब थे

एक गाँव था, एक नीम का पेड़ था और कुछ कच्चे चबूतरे थे

एक मैं था, एक जमीन थी जिसमें मिट्टी के भविष्य वाले घर थे

हाँ, थे तो मिट्टी के ही मगर मेरे सुकून और शरारत के प्रतीक थे


बस तुम्हारी तरह मैं भी खो गया था उस खत में

मगर महज़ एक लम्हे बाद कुछ ध्यान दिया

थे, आखिर क्यों ये सिर्फ थे

या यों कहूँ की ठहराव की वो प्रवृत्ति जिसे नाप तौल में भूल गए,

ठीक उसी तरह, वो ख़्वाब वो रंग, वो मिट्टी के घर, वो सुकून,

वो तमाम किस्से वक्त की तरह बीत गए!


खैर बदलाव ठहराव का साथी नहीं है ये मुझे समझ आ चुका है,

हर रंग रोशनी से प्रेरित है और हर बारिश उन कच्चे चबूतरों को खिरा देती है

हर पुरानी किताब का नया पन्ना धूल में चुप जाता है और

हर अस्तित्व की पहचान वक्त के साथ सुलेख के अक्षरों के तरह मोड़ दी जाती है,


मगर, इस बार फिर एक शुरुआत होगी,

अब हर उन पुराने ख्वाबों और खतों से मुलाकात होगी,

सब्र के मकान होंगे उनमें सुकून की किताबें होंगी,

लम्हों की कीमतों पर इल्म होगा और हर शाम सतरंगी मौसम में बरसात होगी !

था, इस शब्द को बा-इज्ज़त एक बक्से में बंद कर, है, इस शब्द से कुछ वार्तालाप होगी,

वो जो बीत गया उस लम्हें से कुछ सीख लेकर, उन पुराने जज़्बातों का फिर सत्कार होगा

अब हम वो नहीं रहेंगे जो सिर्फ बदल कर रह जाए, ठहराव की प्रवृत्ति के सुअंश का सम्मान होगा

कीमतें होंगी, हिसाब होगा, वक्त, मुश्किलें, सुकून सब होंगे

कितने ही बदलाव कयामत से होंगे, मगर सिर्फ ठहराव के खयाल होंगे ।



Rate this content
Log in

Similar hindi story from Abstract