स्वर्णिम राज्य का रहस्य अध्याय-1
स्वर्णिम राज्य का रहस्य अध्याय-1
स्वर्णिम गढ़ " यानी अपने आप में एक पूर्ण गढ़ । यह वह भूमि थी जहां की हवाओं में खूबसूरती बहती थी , जहां प्यार की छांव थी और शांति का पहरा था।
वक्त कब बदला और इस शांत गढ़ ने कब एक विशालकाय( स्वर्णिम राज्य) का रूप ले लिया किसी को पता तक नहीं चला। इस राज्य में राज करने वाले स्वर्णिम राज्य के राजा (युद्ध बाण) और उनकी पत्नी रानी (सुलोचना) थी और उनकी इकलौती पुत्री इस राज्य की उत्तराधिकारिण ( राजकुमारी नेत्रा) थी। राजा रानी को कोई भी पुत्र नहीं हुआ था। लेकिन उन्हें इस बात का कोई दुख नहीं था । लेकिन समय बिता गया, अब महाराज अक्सर बीमार रहने लगे। वह कोई अनसुनी अनदेखी बीमारी से जूझने लगे । इस बीमारी के चलते उनके हाथ पैर कार्य करना बंद कर गए। कई वेद गुरुओं ने उनका उपचार किया लेकिन कोई भी उनकी बीमारी की जड़ तक नहीं पहुंच सका । अब वह राज्य का कारोबार और राज गधी नहीं संभाल सकते थे । वह अब सारा दिन अपने कक्ष में अपने बिस्तर पर लेटे रहते थे। इस समय राज सिंहासन में शासन करने वाला कोई नहीं था। तभी राजा साहब की राज्य के प्रति जिम्मेदारी निभाते हुए रानी साहिबा दे राज्य के कारोबार की जिम्मेदारी संभाली। लेकिन कब तक एक रानी राजगद्दी की जिम्मेदारी संभाल सकती है। अब राजमहल में खुसर फुसर शुरू हो गई थी। क्योंकि उनकी इकलौती पुत्री थी जो की गद्दी पर बैठ नहीं सकती थी । 'रानी साहिबा को जब यह बात पता चली तो यह बात वह सोचने लगी कि वह क्या कर सकती है ?'तो उन्होंने अगले ही दिन राज महल में बैठक रखी। राज भवन में राज्य के कार्यकर्ता और राज्य के तीन वजीर और अन्य मंत्री सभी मौजूद थे। रानी साहिबा ने अपनी बात रखी ।
" हमे लगता है कि अब राज्य का कारोबार किसे जिम्मेदार हाथ में दिया जाए इस बात पर आप सब का क्या ख्याल है आप सब अपने प्रस्ताव हमारे सामने प्रस्तुत कर सकते हैं ।"रानी साहिबा ने अपनी बात खत्म की ।
इस पर सभी विचार करने लगे लेकिन किसी के पास इसका उत्तर नहीं था । तभी तीनों वजीरों में से दूसरे और तीसरे वजीर ने अपनी बात रखी वह अपनी जगह खड़े होकर कहने लगे "प्रणाम रानी साहिबा हमें लगता है कि जब तक राजा साहब पूर्ण तरीके से स्वस्थ नहीं होते तब तक हम दोनों को राज सिंहासन का संभालने का आदेश दे और जब तक आपको कोई पुत्र नहीं होता है तब तक हम अच्छे से राज सिंहासन को संभाल लेंगे । " इतना कह कर दोनों वजीर अपने स्थान पर बैठ गए। यह बात राज भवन में किसी को अच्छी नहीं लगी लेकिन किसी ने इसका विपरीत उत्तर नहीं दिया। थोड़ी देर खामोशी के बाद बड़े वजीर बोले " रानी साहिबा हमारी राजकुमारी इतनी कुशल और निपुण हैं कि वह यह राज्य अच्छे से संभाल सकती है ,वह राजपथ और युद्ध कला में पूर्ण सक्षम है हमें लगता है कि राज्य सिंहासन की असली हकदार राजकुमारी नेत्रा है । अब जैसा आप चाहे हमने अपनी बात रख दी रानी साहिबा ।" बड़े वजीर जी ने इतना कहा और वह अपने स्थान पर बैठ गए।
'रानी साहिबा ने कुछ देर सोचा और फिर बोली'- " हमारी राजकुमारी इतनी कुशल तो है लेकिन अकेले इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालने के लिए छोटी है। इस लिए हमने सोचा है की राजकुमारी अकेले नही बल्कि अपने राजकुमार के साथ राज्य संभालेंगी। इसलिए हम उनके विवाह की घोषणा करते हैं । राजकुमारी नेत्रा के विवाह के लिए अलग-अलग राज्यों के कुमारों को विवाह का प्रस्ताव भेजा जाए, प्रस्ताव भेज ने के साथ-साथ उसमें लिखवा दिया जाए कि राजकुमारी नेत्रा से विवाह करने के तुरंत बाद उनको स्वर्णिम राज्य का राजा घोषित कर दिया जाएगा ।"रानी सुलोचना ने अपना हुकुम चलाते हुए बोला। सभी को यह प्रस्ताव बेहद पसंद आया और इस पर सब ने अमल किया। पूरे स्वर्णिम राज्य और पास के अन्य राज्यों में राजकुमारी नेत्रा के विवाह की घोषणा फैला दी गई। स्वर्णिम राज्य में राजकुमारी के विवाह की सूचना फैलते ही सभी में खुशियां फैल गई , क्योंकि उन्हें अब नया राजा मिलने जो वाला था। जैसे ही राजकुमारी नेत्रा को यह ज्ञात हुआ, उसी समय वह तुरंत अपनी मां के पास आई और उनसे कहने लगी -"मां आपने जो हमारे लिए सोचा होगा वह अच्छा ही होगा, लेकिन हम इस राज्य को और अपने पिता श्री को छोड़कर कहीं भी नहीं जाएंगे। " अपनी पुत्री की यह बात सुनकर रानी सुलोचना भावुक हो गई और बोली -"हमारी पुत्री आप कहीं भी नहीं जाएगी, आप के लिए स्वयं राजकुमार आएंगे और आप दोनों मिलकर अपने राज्य में राज करेंगे। यह बात सुनकर राजकुमारी नेत्रा बेहद खुश हो गई और अपनी मां के गले लग गई। 'लेकिन गले लग कर वह कहने लगी ऐसा राजकुमार मिलेगा कहां ? जो हमारे लिए अपना राज्य छौड़कर आएगा। रानी सुलोचना नेत्रा को अपने से दूर करके कहना शुरू किया -" इस बात कि चिंता आप मत कीजिए। आप अपने अन्य कार्य कीजिए और खुश रहिए। "रानी सुलोचना ने अपनी बात पूरी की।
शुक्रिया मां !हमें आप पर पूरा भरोसा है आप जो भी करेंगी अच्छा ही करेंगी। यह बोलकर राजकुमारी नेत्रा वहां से चली गई। रानी सुलोचना मन ही मन बेहद ही खुश थी, उनकी खुशी सिर्फ वही जानती थी।
( क्या !आप सभी को लगता है की रानी
सुलोचना अपनी पुत्री राजकुमारी नेत्रा
के लिए सक्षम राजकुमार ख़ोज पाएंगी? )
अगले भाग में जानिए आगे की दास्तान स्वर्णिम राज्य कहानी अब की श्रृंखला मे पड़े-
कहानी पढ़ने के लिए धन्यवाद।
लेखिका कहानियों की लहर

