स्वर्णिम राज्य का रहस्य अध्याय 2
स्वर्णिम राज्य का रहस्य अध्याय 2
"स्वर्णिम राज्य का रहस्य" अध्याय- 2 कौशल राज्य के राजकुमार अक्षतयम के विवाह का प्रस्ताव भेजना
"राजकुमारी नेत्र अपनी मां के कक्ष से निकलकर सीधे अपने पिता श्री के कक्ष में पहुंची।' जहां पर वेद ऋषि महाराज युद्ध बाण का उपचार कर रहे थे। महाराज अपने शाही पलंग पर लेट कर उन्हें एक टक देख रहे थे।"
'राजकुमारी नेत्रा ने वेद ऋषि जी के पास आकर उन्हें प्रणाम किया और आगे कहने लगी -"प्रणाम ! वेद ऋषि जी अब पिता श्री का स्वास्थ्य कैसा है?"
"प्रणाम! राजकुमारी अब आपके पिताश्री का स्वास्थ्य स्थिर है, लेकिन कुछ समय लगेगा उन्हें पूर्ण रूप से स्वस्थ होने में परंतु वह स्वस्थ हो जाएंगे। उन्हें बस आपके प्यार और साथ की जरूरत है और वह विश्राम करेंगे तो वह स्वस्थ हो जाएंगे। राजकुमारी अब हम चलते हैं, हमे आज्ञा दीजिए ।" इतना कह कर वेद ऋषि कक्ष से बाहर चले गए।
'वेद ऋषि के कक्ष से बाहर जाने के बाद राजकुमारी नेत्रा ने अपने पिता श्री का हाथ थाम कर उनके सामने बैठ गई और कहने लगी -"पिताश्री आप जल्द ही स्वस्थ हो जाएंगे, आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।"
(एक पिता अपनी पुत्री की बातें ध्यान से सुन रहे थे। क्योंकि वह इस समय वो अपनी बीमारी के चलते ज्यादा कुछ बोल नहीं पा रहे थे, लेकिन ! अच्छे से सुन और देख पा रहे थे )
राजकुमारी नेत्रा ने आगे कहना जारी रखा पिताश्री हम आपसे एक महत्वपूर्ण बात करने आए हैं। पिताश्री मां ने हमारे विवाह की घोषणा कर दी है, लेकिन आप चिंता मत कीजिए । क्योंकि आपकी पुत्री आपको छोड़कर कहीं भी नहीं जाएगी। हम यही रहेंगे विवाह के पश्चात भी अपने राज्य की देखरेख करेंगे। क्योंकि मां ने घोषणा की है, जो भी राजकुमार हमसे विवाह करेगा वह इस राज्य का राजा कहलाएगा।"
(जैसे ही राजकुमारी नेत्रा ने अपने बोल रॉक उसी समय एक आवाज आई - क्या वार्तालाप हो रही हैं पिता और पुत्री में? ज़रा हम भी जानें ।)
यह आवाज किसी और कि नहीं बल्कि रानी सुलोचना की थी। जो कि महाराज के लिए भोजन लेकर आई थी।
राजकुमार नेत्रा ने अपनी मांँ को उत्तर देते हुए बोली -हम तो बस अपने विवाह की और आज की हुई घोषणा के बारे में बात कर रहे थे।
"अच्छा यह बात है! हमने सही किया ना महाराज हमारी राजकुमारी अब बड़ी हो गई है। इसलिए हमने यह निर्णय ले लिया। आप खुश तो है हमारे इस निर्णय से बताईए।"
रानी सुलोचना अपनी बात खत्म करके महाराज के लिए जल और भोजन परोसने में लग गई।
" महाराज ने उत्तर देते हुए अपनी नजरे हिला कर और राजकुमारी नेत्रा के सर पर अपना हाथ रख दिया। राजकुमारी नेत्रा यह देखकर बेहद खुश हो गई।"
मैं देख कर रानी सुलोचना बोली -"आप भी अपने कक्ष में जाइए और विश्राम कीजिए आने वाले समय में बहुत से कार्य भी करने हैं आपको ।"
राजकुमारी नेत्रा ने अपने पिता श्री और मां को प्रणाम किया और कक्ष से बाहर चली गई।
"रानी सुलोचना ने भोजन कराया उनको औषधि दी और तुमको निद्रा करा कर कक्ष से बाहर चली गई। "
राजकुमारी नेत्रा भी अपने कक्ष में विश्राम करने लगी। रानी सुलोचना भी दिन भर के कार्यों से थककर विश्राम करने चली गई।
(अब अगली सुबह राजकुमारी नेत्रा के विवाह की सूचना आसपास के सभी राज्यों में फैल गई)
कौशल राज्य के राजा भविष्यण चंद्र को जैसे ही यह सूचना मिली उन्होंने ने तुरंत अपने दूसरे पुत्र " राजकुमार अक्षतयम " के विवाह का प्रस्ताव भेज दिया बिना किसी भी देरी के। प्रस्ताव भेजने के लिए उन्होंने अपने खास
दूत को बुलवाया प्रस्ताव भेजने के साथ-साथ , उन्होंने 21 सोने के थाल में भरकर हीरा , मोती, जवाहरात के साथ सिंगार का सामान और कौशल राज्य के विशेष मिष्ठान और सुंदर-सुंदर वस्त्र सभी वस्तुओं को राजकुमारी नेत्रा के लिए प्रस्ताव के साथ रखवा दिए । प्रस्ताव के साथ राजकुमार अक्षतयम का एक बड़ा सा चित्र साथ में भिजवा दिया।
इन्हीं सभी वस्तुओं के साथ दूत जी को स्वर्णिम राज्य के लिए विदा किया।
यह सूचना कौशल राज्य के नगर-नगर मैं फैल गई।
जब राजकुमार अक्षतयम को यह सूचना सूचित हुई , तो वह अपनी तलवार बाज़ी का अभ्यास कर रहे थे। उन्होंने अपनी तलवार बाजी का अभ्यास समाप्त किया और तुरंत अपनी मांँ के कक्ष में पहुंचे।
(वैसे तो राजकुमार अक्षतयम बेहद सुलझे हए थे । वह युद्धभूमि और राजपाट में भी निपुण थे। लेकिन उनकी विवाह के प्रति सोच दूसरों से अलग थी। )
"अब आगे राजकुमार अक्षतयम की मांँ यानी कौशल राज्य की रानी अवंतिका के कक्ष में।"
जैसे ही राजकुमार अक्षतयम अपनी मांँ के कक्ष में पहुंचे उन्होंने देखा कि उनकी मां बेहद खुश हैं। क्योंकि उनके छोटे पुत्र का रिश्ता जो तय होने वाला है। उन्होंने अपने पुत्र को देखते ही कक्ष के भीतर आने को बोला।
राजकुमार अक्षतयम ने अपनी मांँ के सामने आकर बोलना शुरू किया - " मां ! यह सब क्या है ? आपको पता है कि हमें अभी विवाह नहीं करना है। तो यह रिश्ते की बात क्यों? " राजकुमार अक्षतयम में अपनी नाराजगी सामने रखते हुए कहा ।
"पुत्र ऐसा नहीं है कि हमें यह नहीं पता की आपको अभी विवाह करने का मन नहीं। लेकिन एक बार तो रिश्ते के बारे में सोच के देखिए। यह रिश्ता स्वर्णिम राज्य की राजकुमारी नेत्रा का है। वह अपने राज्य की इकलौती उत्तरधिकारिणी है। जब आपका उनसे विवाह होगा, तब आप स्वर्णिम राज्य के राजा कहलायेंगे । आपको पता है कि आपके बड़े भाई " राजकुमार अक्षयजीत " राज गद्दी के उत्तराधिकारी है, फिर आप कहां जाएंगे? आप भी तो राज पाठ में उतना ही निपुण हैं। आप का भी उतना ही अधिकार है जितना आपके बड़े भाई का।
रानी अवंतिका ने जैसे ही अपनी बात समाप्त की कक्ष में तेज सी ध्वनि आई ।" हम भीतर आ सकते हैं।"
यह ध्वनि महाराज भविष्यण चंद्र की ही थी। यह आप कैसी बात कर रहे हैं, महाराज आप आ जाइए कक्ष के भीतर। रानी अवंतिका ने उत्तर दिया।
महाराज भविष्यण चंद्र कक्ष के भीतर आकर राजकुमार अक्षतयम के पास बैठ गए और कहने लगे-"आपकी मांँ ठीक तो कह रही है आपका भी तो पूरा अधिकार है राजा बनने के लिए लेकिन हमने अपनी राज गद्दी आपके बड़े भाई राजकुमार अक्षयजीत के नाम कर दी है । लेकिन हम भी एक पिता का दायित्व पूरा निभाना चाहते हैं। इसलिए हमने आपका रिश्ता राजकुमारी नेत्रा के लिए भेज दिया है, अब आप ही बताइए इसमें हमने क्या गलत किया? हमने जो भी किया आपकी खुशी के लिए किया। महाराज भविष्यण चंद्र ने अपनी बात समाप्त की। पिताश्री हम जानते हैं कि आपने जो भी किया हमारी खुशी के लिए और अपने पिता होने के नाते किया। लेकिन यह विवाह हम अभी नहीं करना चाहते।
आखिर राजकुमार अक्षतयम यह विवाह क्यों नहीं करना चाहते ? यह जानने के लिए पढ़ते रहिए स्वर्णिम राज्य का रहस्य अध्याय 3
लेखिका कहानियों की लहर
