शरारती कौवा
शरारती कौवा
जंगल में एक बरगद का पेड़ था उस बरगद के पेड़ के नीचे कौआ रहता था वह कौवा बाकी पश्चियों से एकदम अलग था
उस कौआ में अलग बात यह थी कि वह किसी भी काम को बहुत ही जल्दी कर लेता था सोचता था कि कोई भी काम मेरा सबसे जल्दी हो जाए और उसका मुझे फायदा भी जल्दी हो जाएगा यह बात उस समय की है जब उसे कमरे की मां गर्भवती थी उसकी मां ने एक अंडे का जन्म दिया कब हुआ सोचा कि मैं संडे को अभी फोड़ डालता हूं वह जल्दी से मुझे भाई या बहन मिल जाएंगे जैसे ही उसको भी की मां थोड़ी बाहर गई कि उस कौवे ने अंडे को फोड़ दिया जब अंडा फूटा तो उसमें कुछ चिपचिपा पदार्थ निकला क्योंकि अभी तो बच्चा बड़ा ही नहीं हुआ था तो अंडा से बाहर कैसे आता है कभी नहीं तो शरारत के वजह से जबरदस्ती अंडे से बच्चे को निकालना चाहा
तो दोस्तों इस कहानी से नया सीख मिलती है कि हमें कोई भी काम बहुत जल्दी में नहीं करना चाहिए क्योंकि जल्दी में किया हुआ काम बहुत खतरनाक हो सकता है धन्यवाद

