शिक्षक
शिक्षक
विद्यालय से घर वापस आते ही नवीन के आँखों से आंसू निकलते देखकर माँ चिंतित हो गई।
बाबू क्या हुआ?माँ ने कहा, बता तो सही क्यों रो रहा है तू?
किसी ने कुछ कहा क्या विद्यालय में?
नवीन ने रोते हुए कहा "माँ आज मेरे वर्ग शिक्षक जी ने मुझे डांटा और कहा कि नवीन सही से पढ़।
तू रोज़ होमवर्क पूरा कर के नहीं लाता है।ऐसे ही चलता रहा तू कैसे सफल होगा।आखिर मेरी भी तो जिम्मेदारी है।मैं क्या जबाब दूँगा तुम्हारे माता-पिता को?
दस वर्षीय नवीन इन बातों को कहने के बाद थोड़ा चूप हुआ।माँ ने कहा "नवीन तू रो क्यों रहा है?
शिक्षक जी ने तेरे उज्ज्वल भविष्य के लिए ही तो तुम्हें समझाया है।तू जानता है, जैसे मैं और तेरे पापा तुझसे प्यार करते हैं, उसी तरह शिक्षक भी तुमसे प्रेम करते हैं।
विद्यालय से आने वक्त शिक्षक ने नवीन को अपने पास बुलाया था, पर शिक्षक की बात को अनसुना कर नवीन वापस आ गया था।
माँ की बात सुनकर नवीन की आँखों में पश्चाताप के आंसू साफ-साफ दिखाई दे रहे थे।
अगले दिन नवीन जैसे ही विद्यालय पहुंचा।उसने रोते हुए शिक्षक के चरणों को दोनों हाथ से जकड़ लिया।
शिक्षक ने अपनी दोनों हाथों से नवीन को उठाते हुये कहा
"नवीन रो मत!"
नवीन ने कहा सर मुझे क्षमा कर दीजिए।कल जब आपने मुझे डांटा मुझे बुरा लगा।मैं आपकी भावनाओं को नहीं समझ सका।
मम्मी पापा की तरह आपने भी मेरे उज्जवल भविष्य के लिए ही मुझे समझाया था।
मैं यह न समझ सका। शिक्षक ने कहा..
अरे पगले! बस इतनी सी बात।मैं तो कब का भूल गया।चल तू इक वादा कर आज से तू मन लगाकर अध्ययन करेगा, और कभी भी माता-पिता या बड़ों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचायेगा।
बड़ों की सलाह सदैव नेक राह दिखलाने के लिए होती है।शिक्षक इसलिए हमें डांटते हैं,या दंडित करते हैं।कि कल हम कुछ अच्छा करें।कुछ बेहतरीन करें।
चल तू आंसू पोछ!अब अपने गुरु को भी मत रूला।मैं भले ही बाहर से कठोर हूँ पर अंदर से कोमल हूँ।
