राकेश के निराश स्वर
राकेश के निराश स्वर
कल मुझे मुंबई टूर पर जाना है ,राकेश शाम को घर आते ही बोला । तुम मेरा खाना लगा दो मैं पैकिंग करता हूं। पत्नी हंसते हुए स्वर में बोली सामान ठीक से रख लेना हमेशा कुछ न कुछ भूल जाते हो। सामान पैक कर के सोने की तैयारी कर के राकेश अलार्म लगाना भी भूल गया, ड्राइवर की फोन की घंटी से नींद खुली सर आ गया हूं कितनी देर में आओगे। हां बस मैं भी आता हूं पत्नी ने झट से चाय तैयार करदी राकेश तेजी से पूरे घर में घूमने लगा पत्नी ने पूछा क्यों परेशान हो रहे हो अरे तुमने मेरा चार्जर देखा क्या? नहीं मैंने नहीं देखा, अरे ऑफिस मैं ही भूल गया ,निकलता हुआ लेकर जाऊंगा। बच्चे और पत्नी राकेश को छोड़ने गए पत्नी ने फिर पूछा सामान रख लिया है हां रख लिया, आईडी कार्ड वगैरह, राकेश के मुंह से ओहो निकला आईडी कार्ड लेने के लिए दौड़ा। राकेश के निकलते ही पत्नी की निगाह टेबल पर पड़ी वहां पर हेडफोन पडा था हमेशा हर चीज भूल जाते हैं। राकेश ने फ्लाइट से उतरते ही कॉल किया , पत्नी ने पूछा कोई परेशानी तो नहीं आई? कुछ भूले तो नहीं?
राकेश निराश स्वर में बोला, 25 साल की नौकरी पूरी होने पर यहां मेरा सम्मान था और मेरे साथ तुम्हें भी बुलाया था मैं तो बताना ही भूल गया। पत्नी ने मुस्कुरा कर अपना सर पीट लिया।
