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Niraj Kumar

Tragedy

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Niraj Kumar

Tragedy

पुत्र की चाह

पुत्र की चाह

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बिरजू आज बहुत गुस्से में था क्योंकि उसके घर में आज उसकी छठी बेटी ने जो जन्म लिया था ।परिवार वाले सब बिरजू की पत्नी दामिनी को बुरा भला कह रहे थे ।बिरजू की मां दामिनी को ताने मारते हुए कहती हैं कि इसने तो हमारे कुल का सत्यानाश ही कर दिया है ।इस कुुलनाशिनी ने तो लड़कियां पैदा कर कर के बरादरी वालों के सामने हमारी नाक काट दी ।दामिनी बेचारी परिवार वालों की बातों को सुन रही थी और रोए जा रही थी.उस बेचारी का शरीर तनाव कमजोरी और उचित पोषण के बिना हड्डियों का ढांचा ही बन गया था तभी गांव की स्कूल की मास्टरनी उनके घर बिरजू की बेटियों के परीक्षा परिणाम की रिपोर्ट लेकर आई ।

बिरजू की मां जो जोर-जोर से दामिनी को गालियां दे रही थी उस अध्यापिका को देखकर एकदम चुप हो गई ।अध्यापिका की नजर बिरजू पर भी पड़ी जो लाल पीला होकर गुस्से के कारण चारपाई के ऊपर बैठा था ।मास्टरनी बिरजू की अम्मा से बोली "तुम बड़े गुस्से में लग रहे हो अब तुम गुस्सा छोड़ो और यह मिठाई खाओ तुम्हारी बड़ी पोती अंजलि स्कूल में प्रथम आई है आज स्कूल में बच्चों का परीक्षा परिणाम था मैंने देखा कि आपके परिवार से स्कूल में कोई नहीं आया तो मैं ही आपको यह खुशखबरी देने आ गई ।पर यहां तो आप बड़े गुस्से में लग रहे हो क्या बात है?'

तब बिरजू की अम्मा बोली "मास्टरनी जी क्या बताऊं मैं आपसे हमारी खुशियों को तो मानो ग्रहण लग गया हो ।आज बिरजू की दोबारा लड़की हुई है वह भी छठी ।हम तो इस कुुुुुलछनी दामिनी से एक लड़का चाहते थे ।जो हमारे वंश को आगे बढ़ाएं लेकिन इस मनहूस ने तो लड़कियां पैदा कर करके हमें कहीं का नहीं छोड़ा है ।मुझसे अब और सहा नहीं जाता मैं तो अब इस बिरजू की दूसरी शादी करवाऊंगी ।"मास्टरनी बिरजू की अम्मा की बातों को सुनकर बोली "आप लोग पता नहीं किस दुनिया में रहते हो इस पढ़े-लिखे जमाने में भी लड़का लड़की में भेदभाव करते हो ।और एक पुत्र की चाह के कारण देखो तुम्हारे घर में 6 लड़कियां पैदा हो गई |लड़का लड़की पैदा करना सिर्फ औरत के हाथ में नहीं होता है ।लड़कियां लड़कों से कम नहीं होती । वह भी कुल का ही दीपक होती हैं ।वह तो दो परिवारों का नाम रोशन करती हैं ।आज लड़कियां कहां से कहां पहुंच गई हैं ।कल्पना चावला इंदिरा गांधी प्रतिभा सिंह पाटिल ए सब लड़कियां ही तो हैं ।लड़कियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं ।चाहे वह क्षेत्र खेल का हो शिक्षा का हो राजनीति का हो या व्यापार का हो सभी क्षेत्रों में लड़कियां लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है ।आप जैसे सोच वाले लोगों के कारण ही बेटियों की हत्या कर दी जाती हैं ।वह भी सिर्फ एक बेटे की चाह के लिए ।बच्चे उतने ही पैदा करो जिनका आप अच्छे से पालन पोषण कर सके उन्हें अच्छी शिक्षा दे सके ।"मास्टरनी की यह सब बातें सुनकर बिरजू और उसकी अम्मा चुप हो गए और अंदर ही अंदर अपनी सोच और दामिनी के प्रति अपने बुरे व्यवहार पर ग्लानि से भर उठे ।


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