अनाथ होने का दर्द
अनाथ होने का दर्द
आज जब बहन की विदाई हुई तो बहन सरोज की जुदाई का दर्द नरेश सहन ना कर पाया ।जो दर्द उसने अपने दिल में छुपा रखा था ।वह आंसु बनकर उसकी आंखों से झर झर बहने लगा तथा जोर जोर की सिसकियां लेते हुए वह जमीन पर धड़ाम से गिर गया । तभी उसका भाई छोटू दौड़कर नरेश के पास आया और उसे पानी पिलाया तब जाकर नरेश होश में आया ।दोनों भाई एक दूसरे के गले से लिपट गए और रोने लगे । थोड़ी देर के बाद वह घर के अंदर गए तथा अपने स्वर्गीय माता पिता के फोटो को निहारने लगे । नरेश रोती हुई आवाज में बोला मां पिताजी आज हम दोनों भाइयों ने आपकी अमानत सरोज को उसके ससुराल भेज दिया ।अब तक तो हम उसका ख्याल रखते आए थे ।अब कौन ससुराल में उसका ख्याल रखेगा । फूल सी कोमल वह क्या ससुराल की जिम्मेदारियां निभा पाएगी या नहीं । यह सोच सोच कर दोनों भाई रोते हुए अपने स्वर्गीय मां-बाप को याद करने लगे ।तभी नरेश का मित्र सुरेश वहा आया और दोनों भाइयों को सांत्वना देने लगा ।नरेशअपने मित्र सुरेश से बोला देख सुरेश आज हमारी बहनभी हमसे जुदा हो गई ।सुरेश बोला यह तो जमाने की रीत है ।लड़कियां तो होती ही पराया धन है । 'ससुराल ही उनका अपना घर होता है । तब नरेश सुरेश से बोलता है ।तुझे तो पता ही है कि हमारा पालन-पोषण किस हाल में हुआ है ।जब मां का देहांत हुआ था ।तब मैं केवल 5 वर्ष का था मेरी बहन सरोज 3 वर्ष और छोटू डेढ़ वर्ष का था ।उसके कुछ दिनों बाद ही पिताजी भी स्वर्ग सिधार गए ।उसके बाद हम तीनों एकदम अकेले पड़ गए थे ।अनाथो का जीवन कैसा होता है ।यह हमसे अच्छा और कोई नहीं जान सकता ।दादी ने ही हमारा पालन-पोषण किया ।वह भी वृद्धावस्था में हमारे लिए क्या क्या करती ।हमने तो हर पल अपने परिवार वालों के ताहने सहे हैं ।जिनके मां बाप नहीं होते हैं । उनका जीवन तो नर्क के समान हो जाता है ।रिश्तेदार भी उनसे अपना मुंह मोड़ लेते हैं ।जब भी कोई त्यौहार आता तब तब हम तीनो भाई बहन अकेले में बैठ कर खूब रोते ।क्योंकि चाचा चाची ताया ताई अपने बच्चों को नए नए कपड़े व खिलौने लाते थे ।और हम सोचते थे काश मां पिता जी जिंदा होते तो आज वह भी हमारे लिए कपड़े खिलौने लेकर आते ।हम अपने बचपन में छोटी सी छोटी चीज के लिए तरसते रहे ।परिवार के दूसरे सदस्य ने हमसे नौकरों की तरह काम करवाया । जो समय हमारा पढ़ने लिखने का था । उसमें भी हम काम करते थे ।रात के अंधेरे में छोटू बहुत डरता था । वह हर रोज मेरी छाती से चिपक कर सोता था । उसे लगता था कि मेरा बड़ा भाई मेरी रक्षा करेगा ।हमारी बहन सरोज के सिर पर भी छोटी सी उम्र में सारी जिम्मेदारियां आन पड़ी ।उसने बहन होते हुए भी छोटू और मेरा मां की तरह ख्याल रखा ।बड़ा होने के नाते मैं सरोज और छोटू को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होने देता था ।धीरे-धीरे जब हम बड़े हुए तो हमने मेहनत मजदूरी करके अपना पेट पाला । उससे जो पैसे बचते थे उन्हें हम दादी के पास देते थे ।ताकि जब सरोज की शादी हो तो वह बड़ी धूमधाम से हो ।आज हम दोनों भाइयों ने बड़े धूमधाम से सरोज को विदा किया है ।उसे माता-पिता की कमी का एहसास नहीं होने दिया है ।तभी सुरेश नरेश से बोला पूरा गांव तुम दोनों भाइयों की बहुत सराहना कर रहा है ।लोग कह रहे हैं की बेटे हो तो नरेश और छोटू जैसे हो ।जिनके मां बाप ना होते हुए भी अपनी मेहनत और लगन से अपना भविष्य तो संवारा है ।साथ ही अपनी बहन को भी रानियों की तरह विदा किया ।नरेश सुरेश से बोला सुरेश देख आज हमारे पास सब कुछ है ।लेकिन यह हमारे लिए कुछ मायने नहीं रखता । क्योंकि इस समय हमें अपने मां पिताजी की जरूरत थी ।लेकिन वही हमारे पास नहीं है ।धन दौलत ही सब कुछ नहीं होता है ।इन सबसे बढ़कर भी कुछ होता है और वह होता है ।मां-बाप का प्यार और साथ ।जिसके लिए हम बचपन से ही तरसते रहे ।नरेश सुरेश से बोला कि जीवन में चाहे जो कुछ भी हो । लेकिन कोई बच्चा अनाथ नहीं होना चाहिए ।अनाथ होने का जो दर्द होता है वह जीते जी मरण के समान होता है ।बच्चा हर पल हर क्षण हर सुख दुख में पल पल अपने मां बाप को याद करता रहता है ।और अंदर ही अंदर घुटता रहता है ।मां बाप के बिना बच्चों का जीवन जीवन नहीं रहता ।मां-बाप की कमी उन्हें जीवन भर खलती रहती हैं ।
