अनोखा गोदान
अनोखा गोदान
आज गांव के सरपंच की मृत्यु हुई तो सभी ग्रामवासी सरपंच के घर इकट्ठे हो गए ।और सरपंच के अंतिम दर्शन के लिए भीड़ जुटने लगी ।' सभी लोग परिवार वालों को इस दुख की घड़ी में सहारा दे रहे थे । सरपंच की अंतिम यात्रा निकलने ही वाली थी ।कि तभी एक बुजुर्ग बोला की अंतिम यात्रा से पहले गोदान करना अति आवश्यक होता है ।वह बूढ़ा बुजुर्ग सरपंच की पत्नी के पास जाता है और उससे बोलता है ।क्या सरपंच ने अपने जीते जी कभी गोदान किया था या नहीं ।सरपंच की पत्नी बोली उन्होंने गोदान नहीं किया था । बुजुर्ग बोला तब तो इनसे गोदान करवाना पड़ेगा ।इसके बिना तो इनको गति नहीं मिलेगी ।शास्त्रों में कहा गया है कि मरने वाला व्यक्ति जब धर्मराज के पास जाता है । तो रास्ते में वैतरणी नदी पड़ती हैं ।उस नदी को गौ माता ही पार करवाती हैं ।इसलिए गोदान करना जरूरी है ।तब सरपंच की पत्नी बोली हमने तो गाय पाली नहीं है ।तो अब गोदान कैसे करें तभी गांव के दो-तीन लोग बोल उठे कि हमारे गांव में गाय की कमी थोड़े ही हैं ।इतनी सारी आवारा गाय हमारे गांव में घूम रही हैं तथा हमारी फसलों का भी नुकसान करती हैं ।हम इन में से किसी एक गाय को पकड़ कर ले आते हैं ।तबे गाय को लाने के लिए चल पड़े और थोड़ी देर के बाद एक गाय को रस्सियों से बांधकर ले आए । वह गाय बार-बार भागने की कोशिश कर रही थी ।लेकिन लोगों ने उसे कसकर पकड़ रखा था । तथा उसे डराने के लिए डण्डे के साथ पीट रहे थे । उसके बाद गोदान का कार्य शुरू हुआ । गोदान की सारी रस्में सरपंच का बेटा निभा रहा था । पहले तो गाय को सरपंच के नाम से तिलक लगाया गया उसके बाद उसके चरण धुलाए गए फिर उसे खाने के लिए पेड़ा दिया ।फिर गाय की पूंछ के साथ एक लंबी लाल रंग की डोरी बांधी और उस डोरी को मरे हुए सरपंच के हाथ से स्पर्श करवाया । गाय की आरती उतारी गई । फिर बुजुर्ग आदमी ने बोला कि गोदान की रस्म तो पूरी हो गई ।अब शव ज्यादा देर घर में रखना उचित नहीं है सरपंच की पत्नी बोली अब इस गाय का हम क्या करें ।तभी वहां खड़े लोग उससे बोले करना क्या है ।जैसा सब लोग करते आए हैं ।हम भी वैसा ही करेंगे ।तब उन लोगों ने गाय की रसिया खोली और दो लोगों ने डंडे मार मार कर उस गाय को वहां से भगा दिया । यह सब देख कर मैं बड़ा आश्चर्य में पड़ गया कि यह कैसा अनोखा गोदान था ।पहले गाय को गौ माता मानकर पूजा की ।फिर उसी गाय को पीट पीट कर भगा दिया ।इस तरह के गोदान से मरे हुए व्यक्ति को स्वर्ग की प्राप्ति होगी या नरक की । 'यह विचार मेरे मन में घूमता ही रहा ।यह गाय का सम्मान था या अपमान ।
