पत्नी का साथ उम्र के आखिरी पड़ाव तक
पत्नी का साथ उम्र के आखिरी पड़ाव तक
ये कहानी शुरू होती है एक लड़के की जिसका नाम जय
जय बहुत मेहनत करके सरकारी नौकरी हासिल कर लेता है,और फिर उसकी शादी सरोजनी नाम की एक लड़की के साथ हो जाती है।दोनों खुशहाल अपनी ज़िंदगी व्यतीत कर रहे थे कि अचानक जय की नौकरी किसी कारणवश छूट जाती है लेकिन जय की पत्नी हार नही मानती है और 30 साल की मेहनत से जय को दोबारा नौकरी दिलवा देती है।पत्नी का इतना प्यार और लगन से जय बहुत खुश होता है
और उनके बच्चे भी पढ़ाई लिखाई करते है
लेकिन उम्र के आखिरी पड़ाव तक दोनों का प्यार खत्म नही होता है और दोनों एक दूसरे के बिना रह भी नही पाते
जय की तो अब उम्र भी करीब 60-65 के आसपास हो गयी और जय की तबियत भी नासाज़ रहने लगी।
सरोजनी उनका पूरा ख्याल रखती थी उनकी हर तकलीफ में उनका साथ देती थी जय तो अब खुद का ख्याल नही रख पाता था तो सरोजनी ही उनका ख्याल रखती थी
दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे एक दूसरे का हर सुख दुख साथ मे बांटा करते थे।
उनका ये प्यार देखकर मुझे बहुत खुशी होती थी
की उम्र के इस पड़ाव में भी आकर दोनों का प्यार कम नही हुआ।।। आखिरकार 67 वर्ष की उम्र में जय का देहांत हो गया।
और सरोजनी अकेले रही गयी अपने पति के बिना
आज उनके पति को गुजरे हुए पूरे एक साल हो गए है
पर वो आज भी अपने और जय के बारे में बात करती रहती है कि वो उनसे कितनी सच्ची मोहब्बत करते थे
हर पल हर मुश्किल में उन्होंने उनका साथ निभाया
सरोजनी- वो कही भी होंगे मैं उनसे हमेशा प्यार करती रहूंगी।
मैं दुआ करती हूं मुझे हर जन्म में जय जैसा ही पति मिले
जय आपकी पत्नी सरोजनी।

