प्रेम के नियम
प्रेम के नियम
प्रेम के नियम
स्थान: अमेरिका
मुख्य पात्र:
प्रिया – एक समर्पित Sur (सर्जरी विभाग) नर्स
परेश – उसी अस्पताल में काम करने वाला उसका पति
सावित्री – परेश की माँ, भारत में रहने वाली एक परंपरावादी महिला
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1. अमेरिकी धूप और भारतीय प्रेम
कैलिफ़ोर्निया की वह सुबह कुछ खास थी। अस्पताल की पार्किंग में जब प्रिया और परेश की नज़रें मिलीं, एक अदृश्य संवाद उनके बीच बह गया। पिछले चार सालों से दोनों Sur यूनिट में एक साथ काम कर रहे थे — कभी गाउन बाँधते, कभी मरीज़ों के दर्द बाँटते, और कभी देर रात की ड्यूटी में एक-दूसरे का सहारा बनते।
एक साल पहले उन्होंने कोर्ट मैरिज कर ली थी। परिवार को बताया गया — खासकर परेश की माँ, सावित्री को।
सावित्री थोड़ी नाराज़ थीं। उनके बेटे ने न शादी में बुलाया, न कोई रीति निभाई। लेकिन जब उन्होंने फ़ोन पर प्रिया की शांत और सादगी भरी आवाज़ सुनी, तो गुस्सा पिघलने लगा।
अब खबर आई थी — प्रिया गर्भवती है।
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2. “माँ को बताएंगे?”
प्रिया ने उस शाम पूछा, जब वो दोनों बालकनी में चाय पी रहे थे।
“माँ को बताएंगे?” उसकी आवाज़ में थोड़ी झिझक थी।
परेश ने चुप्पी तोड़ी, “बताऊंगा… लेकिन मुझे डर है माँ को लगेगा कि हमने जल्दी कर लिया।”
प्रिया मुस्कराई, “तो क्या प्रेम के भी नियम होते हैं, परेश?”
परेश ने हाथ पकड़ते हुए कहा, “शायद माँ के हिसाब से होते हैं… लेकिन हमारे लिए नहीं।”
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3. सावित्री का आगमन
जब प्रिया की प्रेगनेंसी की खबर दी गई, तो सावित्री ने सिर्फ इतना कहा:
"मैं अमेरिका आ रही हूँ।"
तीन हफ्तों में वह पहुँचीं।
पहले दिन घर में सन्नाटा था। प्रिया ने खुद खाना बनाया — अरहर की दाल, भिंडी और गरम रोटियाँ।
सावित्री ने कुछ नहीं कहा, पर खाना पूरा खाया।
रात को जब प्रिया को उल्टियाँ आईं, परेश पानी लेने भागा और सावित्री चुपचाप उसके सिर पर हाथ फेरती रहीं।
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4. अलिखित नियम
अगले कुछ हफ्तों में, सास और बहू के बीच एक रिश्ता पनपने लगा — बिना कहे, बिना शर्तों के।
प्रिया हर सुबह ग्रीन टी बनाती।
सावित्री हर रात उसके पेट पर सरसों का तेल लगातीं, पुराने घरेलू नुस्खे बतातीं।
एक दिन प्रिया ने हिम्मत करके पूछा,
“माँ, क्या आपको लगता है कि हमने जल्दी कर दी?”
सावित्री ने मुस्कराते हुए कहा:
“बेटा, प्रेम के नियम किताबों में नहीं होते। मैं सोचती थी कि पहले तुम घर समझो, फिर माँ बनो… लेकिन तुमने तो पहले ही इस घर को अपनेपन से भर दिया। अब कोई चिंता नहीं रही।”
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5. नवजीवन का स्वागत
डिलीवरी वाले दिन, परेश की आँखों में घबराहट थी, प्रिया दर्द में थी, और सावित्री शांति से बैठी थीं।
जब बच्चे की पहली किलकारी गूंजी —
तीनों की आँखों में आँसू थे।
तीन पीढ़ियाँ, एक साथ —
प्रेम, नियमों से नहीं,
विश्वास और अपनत्व से चलता है।
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अंत में दो पंक्तियाँ:
“प्रेम न माँगे दस्तूर,
प्रेम बस बाँधे भरपूर।”
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