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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Tragedy Crime Thriller

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Tragedy Crime Thriller

पहेली : भाग 27

पहेली : भाग 27

7 mins
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गतांक से आगे 


हरेंद्र संदीप के घर से सीधे ही थाने में आ गया । रास्ते में उसने एस पी साहब से बात की कि उसके पास केस बढ़ते जा रहे हैं इसलिए उसे कुछ इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर चाहिए जिससे जांच में तेजी आये । 

एस पी साहब ने उसे दो सब इंस्पेक्टर और एक इंस्पेक्टर देने का आश्वासन दे दिया । 

अभी तक कचरा डिपो वाली लाश की शिनाख्त नहीं हो पाई थी । यद्यपि FSL रिपोर्ट के आधार पर अस्पतालों से सूचनाएं एकत्रित करने का काम चालू हो गया था लेकिन इसमें समय लगने की संभावना थी । उसने इसमें एक काम और किया । वह जानता था कि "स्कल" से चेहरे की ड्राइंग भी बन जाती है । इसके भी विशेषज्ञ होते हैं । हरेंद्र ने एस पी साहब से बात कर एक विशेषज्ञ की सेवाऐं लेने के बारे में सोचा । एस पी साहब ने उसे हां कह दी । पुलिस विभाग के संपर्क वाले विशेषज्ञ से बात कर हरेंद्र ने उसके पास मेल से FSL और PMR दोनों भेज दीं । उस विशेषज्ञ ने इसके लिए तीन चार दिन का समय मांगा । 


कचरा डिपो के चारों ओर के सीसीटीवी कैमरों से केवल कारों की सूचना आई थी तब तक । हरेंद्र के मस्तिष्क में एक बात आई । कहीं वह लाश किसी कचरा लाने वाले कंटेनर के साथ तो नहीं आई थी ? इसकी पूरी संभावना लग रही थी । यह भी हो सकता है कि जब कंटेनर किसी फ्लाईओवर के नीचे से गुजर रहा हो और फ्लाईओवर से यदि कोई व्यक्ति उसी समय नीचे गिर जाये या किसी को कोई गिरा दे तो वह कहां गिरेगा ? 

"तो क्या , वह कंटेनर में गिर जायेगा ? हां , उसी में गिरेगा, और क्या ? वह बेहोश भी हो सकता है या मर भी सकता है" ! हरेंद्र ने अपने सिर पर एक चपत लगाई "साले , ये बात तेरे दिमाग़ में पहले क्यों नहीं आई" ? पर देर आयद दुरुस्त आयद। 

हरेंद्र ने नगर निगम में फोन कर बिठूर कचरा यार्ड में जाने वाले सभी कंटेनरों के ड्राइवर और खल्लासियों को बुलाने के लिए कह दिया । फिर वह उस कचरा डिपो के चारों ओर बने फ्लाईओवरों को देखने के लिए चल दिया । उस कचरा डिपो के चारों ओर तीन फ्लाईओवर बने थे । यदि ऐसी कोई घटना घटी थी तो वह इन तीन फ्लाईओवर में से किसी एक में घटी होगी । उसने उन फ्लाईओवरों का मौका मुआयना किया लेकिन उसे कोई सुराग हाथ नहीं लगा । 

तब वह नगर निगम कार्यालय में आ गया । वहां कंटेनरों के ड्राइवर और खल्लासी उसी का इंतजार कर रहे थे । हरेंद्र उनसे कहने लगा 

"सभी लोग ध्यान से सुनिए । 10 अगस्त की रात में एक लाश बिठूर कचरा डिपो में पाई गई थी । इसकी पूरी पूरी संभावना है कि उस रात कचरा डिपो के चारों ओर बने तीन फ्लाईओवरों में से किसी एक फ्लाईओवर से कोई व्यक्ति दुर्घटनावश नीचे गिर पड़ा हो या किसी ने किसी व्यक्ति को नीचे फेंक दिया हो और वह व्यक्ति किसी कंटेनर में गिर पड़ा हो । यदि ऐसी कोई घटना किसी को याद आ जाये तो मुझे तुरंत बतायें" ।

हरेंद्र के बात समाप्त करते ही ड्राइवर और खल्लासियों में खलबली मच गई । थोड़ी देर कोलाहल होता रहा । फिर एक खल्रासी खड़ा होकर बोला 

"साहब , अभी कुछ दिन पहले की बात है । रात के लगभग 8.30 बजे थे । हमारी गाड़ी "जैतपुरा फ्लाईओवर" के नीचे से गुजर रही थी कि मुझे जोर से धप्प की आवाज सुनाई दी थी । मैंने ड्राइवर साहब से कहकर गाड़ी रुकवाई भी थी और कंटेनर में झांक कर देखा भी था मगर कहीं कुछ नजर नहीं आया तो फिर हम लोग गाड़ी लेकर आगे बढ़ गये । क्यों है ना ड्राइवर साहब" ! 

"हां साहब ! यह सच कह रहा है । उस रात ऐसा ही वाकया हुआ था" ड्राइवर ने खल्लासी की बात का समर्थन कर दिया । पर साथ में ये भी कहा "धप्प की आवाज तो आई थी लेकिन कहां से आई , पता नहीं चल पाया" । 


हरेंद्र ने कहा "हो सकता है कि इतनी ऊंचाई से गिरने के कारण उस व्यक्ति को चोट लगी हो और वह मर गया हो । ऊंचाई से गिरने से वह कचरे के ढेर में धंस भी सकता है इसलिए वह नजर नहीं आया हो शायद" ! 

संभावनाऐं तो अनंत हो सकतीं हैं पर गुत्थी ऐसे ही सुलझती हैं । एक एक संभावना पर काम करना पड़ता है तब जाकर परिणाम हासिल होते हैं । 

हरेंद्र उस ड्राइवर और खल्लासी को लेकर जैतपुरा फ्लाईओवर पर आ गया । वहां उसने सीन रिक्रिएट किया । रात के साढ़े आठ बजे की बात बता रहा है यह खल्लासी । यह समय किशन की नाइट ड्यूटी के समय से मैच खा रहा है । किशन रात को आठ बजे घर से निकला होगा । यहां तक पहुंचते पहुंचते उसे साढ़े आठ बज गये होंगे । तो क्या वह खुद गिरा होगा या उसे किसी ने गिराया होगा ? या उसने किसी को गिराया हो । कुछ भी हो सकता है । यदि किसी ने किसी को गिराया था तो इसका मतलब है कि इसमें एक आदमी और इन्वॉल्व है । मोटा मोटा तो यह तय है कि मरने वाला किशन नहीं है । तो फिर वह दूसरा कौन है जो मरा था ? क्या किसी ने लापता की कोई रिपोर्ट लिखाई थी ? हरेंद्र ने एक पुलिस वाले की ड्यूटी इस बात की लगा दी कि आसपास के क्षेत्र में 10 अगस्त और उसके बाद गायब लोगों की सूची तैयार करें । सूची तैयार भी हो गई । दो नाम सामने आये जिनमें एक महिला थी और एक पुरुष । जो लाश पाई गई थी वह एक पुरुष की थी इसलिए वह महिला तो नहीं थी । जहां तक पुरुष की बात है गुमशुदा पुरुष की आयु 70 वर्ष बताई गई है । इसका मतलब यह है कि मृतक यह पुरुष भी नहीं था । 

अब क्या किया जाये ? हरेंद्र ने लोगों को "पुलिस की सहायता करनी चाहिए" नामक अभियान शुरू किया था । इस अभियान में उसने एक नुक्कड़ नाटक की टीम तैयार की । फिर वह उस टीम को लेकर अलग अलग मौहल्लों में जाता । टीम नुक्कड़ नाटक से पुलिस का संदेश देती । उसके बाद हरेंद्र लोगों को पुलिस पर विश्वास करने के लिए कहता और यह भी कहता कि हर छोटी से छोटी बात भी पुलिस को बतानी चाहिए । 


जैतपुरा मौहल्ला में एक दिन नुक्कड़ नाटक करने के बाद जब हरेंद्र लोगों को समझा रहा था कि पुलिस आपकी मित्र हैं, शत्रु नहीं । तब एक बुढ़िया खड़ी हो गई । उसे हरेंद्र ने अपने पास बुलाया और उससे पूछा कि क्या बात है ? 

बुढ़िया कहने लगी "हमारे घर में एक किरायेदार रहता था । वह पिछले चार पांच दिनों से नजर नहीं आ रहा है । उसका दरवाजा बंद है । उस पर ताला लटक रहा है लेकिन कभी कभी रात में उस कमरे से आवाजें आने लगती हैं । पता नहीं ऐसा क्यों हो रहा है" ? 

"उस किरायेदार का कुछ नाम पता तो होगा । कोई किरायानामा तो लिखवाया होगा आपने । उसका कोई आधार कार्ड तो होगा आपके पास" ? 

"उसका नाम महावीर था साहब । लगभग 50-55 साल का है वह । आधार कार्ड की कॉपी पड़ी होगी शायद" । 

"एक बार मुझे मौका दिखा दें और आधार कार्ड की कॉपी भी दे दें" । 


हरेंद्र बुढ़िया के साथ उसके घर चला गया । दरवाजा बंद था और बाहर से ताला लगा हुआ था । बुढ़िया ने आधार कार्ड की कॉपी हरेंद्र को दे दी । हरेंद्र को कम से कम एक दस्तावेज तो मिला उस केस के बारे में । वह थाने चला आया । 

अस्पतालों से सूची भी आ गई थीं । कूल्हे की हड्डी टूटने के ऑपरेशन कराने वालों के नाम तलाशे गये तो एक नाम महावीर का भी था । यह पांच साल पहले की बात थी । अस्पताल के रिकॉर्ड में महावीर की उम्र 45 साल लिखी हुई थी । इन दो दस्तावेजों से लग रहा था कि वह लाश किसी महावीर नाम के व्यक्ति की थी । लेकिन अभी इस पर अंतिम मुहर लगनी बाकी थी । 


हरेंद्र सभी कड़ियों को जोड़ने में लग गया । तभी उसके मोबाइल में नोटिफिकेशन आने की टोन सुनाई दी । स्कल विशेषज्ञ ने मेल भेजा था । उसने उत्सुकता से वह चित्र देखा जो स्कल विशेषज्ञ ने तैयार किया था । फिर उस चित्र को महावीर के आधार कार्ड के फोटो से मैच किया तो वह मैच हो गया । अब पुख्ता सबूत मिल गये थे । कचरा डिपो में पाई गई लाश महावीर की थी न कि किशन की । फिर किशन कहां है ? अब किशन को भी ढूंढना होगा और महावीर के बारे में और जानकारी जुटानी होगी कि उसकी मौत कैसे हुई । हरेंद्र ने पहली उपलब्धि हासिल कर ली थी । उसने एस पी साहब को यह खुशखबरी दी तो उन्होंने भी हरेंद्र को ढेर सारी बधाइयां दे दी । हरेंद्र का आत्मविश्वास इससे और भी बढ़ गया था । 


शेष अगले अंक में 



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