STORYMIRROR

JAYANTA TOPADAR

Comedy Drama Action

3  

JAYANTA TOPADAR

Comedy Drama Action

नाटकीय

नाटकीय

4 mins
25

अंक १

(पर्दा उठता है।)


(बेसरकारी विद्यालय के प्रधानाध्यापिका 'मैडम लुक्स' अपने विभागीय कक्ष में आदतन गुस्सैल व चिंतामग्न अवस्था में अपनी आरामदायक कुर्सी पर विराजमान। किसी विशेष व्यक्ति के आने की प्रतीक्षा...)

(उस व्यक्ति का प्रवेश। 'अच्चा' आदतन चापलूसी में अपना सर झुकाए प्रवेशद्वार से अंदर आकर नमस्कार मुद्रा में चमचागीरी का नमूना पेश करता हुआ...)


अच्चा - "नमस्कार, मैडम जी!"


मैडम लुक्स - "नमस्कार! नमस्कार! बताइए आज की ताज़ा खबर क्या है!" (बड़ी आग्रह दिखाती हुई...)


अच्चा (खुशामदी की पहले पायदान पर) -- "मैडम ! मैंने अपने हाथों से आपके लिए ये नारियल के लड्डू और आम का अचार तैयार करके लाया। समय निकाल कर इनका स्वाद लीजिएगा...!"


मैडम लुक्स (बीच में टोकते हुए) -- "अरे, इनकी क्या ज़रूरत थी! आप ने खामख्वाह इतनी तकलीफ़ की...!!"

(हक़ीक़त में बहुत गदगद होती हुई दोनों डब्बे ग्रहण करती हुई...)

"हाँ, तो अब आगे बताइए...!!!'


अच्चा (अपनी नाटकीय अंदाज़ में खुसुर-फुसुर करता हुआ...अपने फायदे के लिए अपने दुश्मन-सम सहकर्मियों के खिलाफ नमक-मिर्च लगाकर झूठ का बाज़ार खोलकर बैठ गया...)


मैडम लुक्स ('अच्चा' की हाँ में हाँ मिलाते हुए...) -- "तो ये बात है? वो उनके घर गया था? ये किया था? (फलना-ढमका...)"


अच्चा (अपने कुटिल राजनीति में कामयाब होते हुए...) -- "आप बेफिक्र रहिए मैडम जी, मैं हर पल की खबर आपके कानों तक पहुंचाता रहूँगा! आप नारियल के लड्डू चखिए....!!" (ये कहते हुए विद्यालय भेदी विभीषण प्रधानाध्यापिका के विभागीय कक्ष से एक रहस्यमयी मुस्कान बिखेरता हुआ निकलता है।)


(अलार्म बेल बजता है। चपरासी 'कम्लू' का प्रवेश। वो भी चमचागीरी में महारत हासिल कर चुका बंदा है, जिसने कुछ अरसे पहले अपने भैया 'मज्जू' के साथ मिलकर 'दि्ग्गू' जैसे सीधेसादे और ईमानदार चपरासी को बड़ी बेरहमी और बेहयापन से 'लुक्स' से भिड़ाकर नौकरी से निकाल बाहर करवाया था। लेकिन ऊपरवाले से 'कम्लू' के भैया 'मज्जू' को भी 'चोरी' करते हुए रंगेहाथों पकड़वाकर हमेशा के लिए नौकरी से बरखास्त करवाया। जैसी करनी : वैसी भरनी।)


कम्लू (अपने चमचागीरी के पुराने अंदाज़ में दाँत दिखाकर जबरदस्ती हंसने की बेकार कोशिश करके) -- "मैडम, आपने मुझे बुलाया?"


मैडम लुक्स -- "सर जुमला को बुलाकर लाओ!!!"

(कम्लू बाहर जाता है।)


कम्लू (दसवीं कक्षा के बाहर द्वार के सामने) -- "सर, मैडम आपको बुला रहे हैं।"


जुमला (थोड़ी नाखुशी में) -- "उनसे कहना मैं अभी अपना कर्तव्य निभा रहा हूँ। जब 'क्लास' नहीं रहेगा, तभी उनसे मिलूँगा। अपना पहला ज़रूरी काम छोड़कर उनसे मिलना अभी मैं ज़रूरी नहीं समझता। जाकर, जो कहना है, कह देना। अगर हो सके तो चापलूस 'अच्चा' जैसा ही नाटकीय अंदाज़ में 'मैडम' को 'खबर' देना!!!"


(कम्लू अपना-सा मुँह बनाकर प्रधानाध्यापिका के विभागीय कक्ष में प्रवेश कर) -- "सर जुमला अभी दसवीं कक्षा में पढ़ा रहे हैं। वे बाद में आएंगे।"

(ये सुनकर 'मैडम' आगबबूला हो जाती हैं। चपरासी वहाँ एक पल भी नहीं रुकता है।)

(नेपथ्य में पिरियड खत्म होने की घंटी बजती है। पर्दा गिरता है।)


अंक २ 

(पर्दा उठता है। प्रधानाध्यापिका का विभागीय कक्ष। सर 'रब्बा', सोशल साइंस का नया शिक्षक, थोड़ा टेढ़ा, हद से ज़्यादा ईमानदार और मुंहतोड़ जवाब देने की औकात रखनेवाला एक बेहतरीन शिक्षक। किसी बात पर, किसी खास चमचे के मिथ्याचार की वजह से दोनों के बीच में वाद-विवाद, गहमागहमी)


मैडम लुक्स (सर रब्बा से गुस्साए हुए) -- "यू कैन नॉट टॉक टू मी लाईक डैट!!! यू आर नॉट ए लोकल टीचर हियर।" 


रब्बा (बेपरवाही में थोड़ा मुस्कुराते हुए) -- "देन यू आर आलसो नॉट ए लोकल हियर...!!!" (बहस पे बहस चलती रहती है। तब सर जुमला का उस कक्ष में प्रवेश।)


मैडम लुक्स (वही चिरपरिचित कर्कश अंदाज़ में में सवाल) -- "आपने ये क्या लिखा?....कल शाम कहाँ गए थे? क्यों गे थे?" (और बहुत कुछ बेतुकी बातें...)


जुमला -- "हू आर यू टू आस्क मी एबाउट माई पार्सनल लाईफ??? वाट आई डू आर ह्वेरेवर आई गो वीद माई वाईफ इन दि इवनिंग इस माई कन्सार्न, डैट्स नान आफ ईयोर बिज़नेस, मैडम!!! प्लीज़ डोन्ट इन्टरफेयर इन्टु आदर्स पार्सनल लाईफ!!!"

"एंड बाई द वे, वाट इज़ द लाजिक ईन रिमाइंडिक ए टीजर वेदर ही ईज़ ए लोकल आर आउटसाइडर??? प्लीज़ डोन्ट डिस्क्रिमिनेट एमांग टीचर्स आन द बेसिस आफ 'रिजन'...इट्स आनफेयर...!!!"

"एज़ ए हेडमिस्ट्रेस यू डिजर्भ आवार आनर एंड यू वील डेफिनिट्ली गेट इट, ईफ यू बी देयर, ह्वेर यू शुड बी एक्चुअली...!!!"

(दोनो शिक्षक गुस्से में गुहारते हुए कक्ष से निकल जाते हैं।)


रब्बा (जुमला से) -- "धन्यवाद भाईसाहब!

आपने इतनी हिम्मत के साथ मेरा साथ दिया। आपको मैं हमेशा याद रखूँगा। शायद मैं इस कलुषित मनोभाव रखनेवाले कुछ लोगों की वजह से यहाँ लंबे समय तक नौकरी कर न पाऊँ...।" (थोड़ा चिंतित दिखाई देता हुआ...)


जुमला -- "रब्बा भाई, हिम्मत मत हारिए। एक दिन इनकी ये रियासत ही नहीं रहेगी, तो ये किन चमचों के दम पर हम पर अपना रौब दिखा पाएंगी....!!! बस सही समय की प्रतीक्षा करें। एक बात हमेशा याद रखिएगा -- सौ सुनार की : एक लोहार की !!!"


(दोनों शिक्षक 'भोजनावकाश' के समय अपना-अपना 'टिफिन बाक्स' खोलकर भोजन करने बैठ जाते हैं। दूर से 'खबरी' अच्चा दोनो पर पैनी नज़र रखते हुए, अपने महिला सहकर्मियों के साथ वही 'खुसुर-फुसुर' और नारियल के लड्डू और अचार पेश करता हुआ। मगर रब्बा और जुमला को इस 'पार्टीबाजी' से कोई सरोकार नहीं।)


(पर्दा गिरता है।)



Rate this content
Log in

Similar hindi story from Comedy