STORYMIRROR

JAYANTA TOPADAR

Others

4  

JAYANTA TOPADAR

Others

कार्यक्रम की तैयारियाँ

कार्यक्रम की तैयारियाँ

4 mins
10

पात्र परिचय :


सुमंगल :   कार्यक्रम परिचालक

प्राण   :    अनुशासन का  दायित्व

राखेहरी :  छायाचित्रकार

हिमगिरि:   राजनेता

डिजू :    विधायक

भांगूराम :  ट्रक चालक

राजपाल :  विद्युत कारीगर

पाखी:    उद्घोषक (महिला)

काया:    सजावट प्रभारी 

सुशी  :  खाद्य वितरण का  दायित्व

रोली:   चाय वितरण का दायित्व

सामिया  :  संगीत निर्देशक 

जयेश:    पत्रकार

जग्गा  :    सफाईकर्मी 

इंस्पेक्टर रोबो  :  थाना प्रभारी

मीनूश्री:  अवर निरीक्षक (सब इंसपेक्टर)


 (पर्दा उठता है।)        


             दृश्य-१


(सुबह के साढ़े आठ बजकर तीस-बत्तीस मीनट हुए होंगे...जगह : खुला मैदान...जलसा की तैयारियां चल रहीं हैं...किसी विशिष्ट अतिथि का आगमन होगा...नेपथ्य में पार्श्व संगीत मध्यम सुर में...)


भांगूराम   :  जग्गा! ओ जग्गा! सफाई का काम छोड़कर कहाँ छुपे बैठे हो? हमेशा उस 'मोबाईल फोन' से क्यों चिपके बैठे रहते हो? विधायक जी की'जी हुज़ूरी' कर अपने पेट की जुगाड़ तो कर लिए हो...अब ज़रा ईमानदारी से अपना काम भी किया करो...!

 (गुस्से से बौखलाए हुए भांगूराम अपनी ट्रक लेकर  निकल पड़ा। 'कामचोर' जग्गा पेड़ के पीछे छिपकर सारी बातें सुनता रहा...मगर एक बार भीउसने अपना चेहरा नहीं

दिखाया! कामचोरी जो उसके नस-नस में बसा है!)


सुमंगल : (अपनी घड़ी पर नज़र डालकरअपने मोबाइल फोन से बातकरते हैं...)

"अरे प्राणांत! कैसी तैयारियां चल रही हैं?"


प्राणांत  : मैंने राखेहरी और राजपाल -- दोनों को अपना-अपना दायित्व सौंप दिया है...!


सुमंगल   : (थोड़ी असंतुष्टि दिखाकर)केवल दायित्व सौंप कर ही काम खत्म न कीजिए! इस बात पर पूरा गौर कीजिए  कि कार्यक्रम के दौरानछायाचित्रकारी और विद्युत

कारीगरी में कोई खामियां न आए...वरना..!


प्राणांत   : (पूरे आत्मविश्वास सहित) आप बेशक़ यक़ीन कीजिए कार्यक्रम में कोई बाधा नहीं आएगी।


सुमंगल  : ठीक है। आप सामिया, काया,पाखी, सुशी और रोली को पंद्रह मिनट में मेरे कार्यालय में पहुंचने को बोलिए। कुछ ज़रूरी बातें करनी हैं।


(पर्दा गिरता है।)


(पर्दा उठता है।)


            दृश्य-२


(कार्यालय का दृश्य। कार्यक्रम परिचालक सुमंगल अपने लैपटॉप पर ज़रूरी काम करने में व्यस्त। दीवार पर पैंडुलम घड़ी ; पास ही महात्मा गांधी जी का चित्र, श्रीरामचंद्रजी एवं सीता मैया जी की चित्रांकित एक बड़ी कैलेंडर ; मेज़ पर एक ग्लोब, श्री रामकृष्ण परमहंस जी, शारदा माँ और स्वामी विवेकानंद जी का संयुक्त चित्र फोटोफ्रेम में, कुछ श्वेत पुष्प, प्रज्ज्वलित धूप एवं दीया...एक अनुपम परिवेश...सामिया-काया-सुशी और रोली का प्रवेश)


 सुमंगल (लैपटॉप से अपना ध्यान हटाते हुए) :"तो कैसी तैयारियाँ चल रहीं हैं आप सबकी? एक-एक करके बताइए।"

  

सामिया : (स्वाभाविक रूप से आत्मविश्वासी मन से)

"मैंने स्वागत-गीत की तैयारी अच्छी तरह कर ली है।आप निश्चिंत रहिए, महोदय! मैं कभी कोई रिस्क नहीं लेती, बस पूरी ईमानदारी से अपना दायित्व  निभाती हूँ। कभी कोई कोताही  नहीं बरतती हूँ।


काया  :  (हमेशा की तरह शंकित एवं विचलित होकर, थोड़ी आवेशित  भाव से) "सर, मैंने सब सजावट का काम दो सप्ताह पहले ही... "


सुमंगल : (सुमंगल थोड़ी असंतोष व्यक्त करते हुए) "आप आज का अपडेट दीजिए, दो सप्ताह पहले का नहीं!"


काया : "सर, मैं क्या कह रही थी...(बहुत अप्रस्तुत-सी दिखती हुई) मैंने पाखी  से उस विषय में... (सुमंगल बीच में टोकते हुए...)


सुमंगल : (बीच में ही बात को टोकते हुए) "आप अपनी बात कीजिए...! आपने खुद क्या तैयारियाँ कीं हैं,        वो सही-सही बताइए। कल का कार्यक्रम सजावट पर बहुत हद तक निर्भर करेगा। ये बात आप याद रखिए, भूलिएगा नहीं! "


           

(सुमंगल पाखी, सुशी और रोली -- तीनों को कुछ ज़रूरी निर्देश देते हुए बातचीत समाप्त करते हैं। फिर सब अपने-अपने काम पर लग जाते हैं, क्योंकि तीन दिनों बाद प्रतिभाशाली राजनेता हिमगिरि जी का आगमन होगा...तैयारियाँ तो करनी ही हैं!)


(मोबाइल फोन की रिंगटोन बजने की आवाज़)


सुमंगल : "हैलो ! हाँ, प्राणांत बोलिए...!!!"


(दूसरी ओर से आवाज़ आई)


प्राणांत : सर, मुझे कुछ ज़रूरी बात करनी है हमारे होनेवाले कार्यक्रम की तैयारियों के बारे में...मैं ये देखा है  कि...


(सुमंगल आग्रह दिखाते हुए...)


सुमंगल : "हाँ, बताइए आपने क्या देखा है...!"


प्राणांत : मुझे ये बताते हुए बहुत अफसोस हो रहा है कि सफाई कर्मी जग्गा अपने काम से पीछे हट रहा है। वो अपनी आदत से बाज़ नहीं आता। बस विधायक डिजू के दम पर नए-नए बहाने बनाकर...कभी गाय चढ़ाने निकल पड़ना और गाय बांधकर बड़े आराम से मोबाइल फोन पर विडिओ देखना...जब कोई ज़रूरी काम केलिए उसे बुलाया जाए, तो उसके  बहाने शुरू हो जाते हैं। हक़ीक़त तो ये है कि जग्गा विधायक जी के अलावा किसी की भी नहीं सुनता...


सुमंगल : (बीच में टोकते हुए) छोड़िए उस कामचोर की बात! उसे समझ पाना नामुमकिन है! हमें किसी भी सूरतेहाल में अपना काम पूरा करना है। जग्गा हो या न हो, इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता। समझे आप?


प्राणांत : जी, सर! (दूसरी ओर से फोन का संपर्क बंद होता है। सुमंगल अपने मोबाइल फोन से किसी से बात करते हैं...।)


(पर्दा गिरता है)       


दृश्य-३


(नगर के बीचोबीच अवस्थित थाना। चहलकदमी करते मुस्तैद पुलिसकर्मियों की व्यस्तता। अपने कैबिन में थाना प्रभारी इंस्पेक्टर रोबो फाइलों पर नज़र डालते हुए...तभी फोन की घंटी बजती है। इंस्पेक्टर रोबो टेलीफोन का रिसिवर उठाते हैं।)


इंस्पेक्टर रोबो : "हैलो! इंस्पेक्टर रोबो स्पीकिंग। मे आई हेल्प यू?"


सुमंगल : "नमस्कार! मैं सापुर-कांगड़ा गाँव से कार्यक्रम परिचालक सुमंगल बोल रहा हूँ। आपको तो पता ही होगा कि परसों हमारे गाँव में प्रतिभाशाली  राजनेता श्री हिमगिरि जी का आगमन होगा। वे यहाँ कई महत्वपूर्ण भवनों के  लोकार्पण समारोह में अंशग्रहण करेंगे। इसलिए उस दिन हमारे गाँव में आपके थाने की सहयोग  की ज़रूरत है।"


इंस्पेक्टर रोबो : "सर, मैं और अवर निरीक्षक मीनूश्री अपने दल के साथ आज से ही आपके इलाके की सुरक्षा व्यवस्था की देखरेख करने का दायित्व ग्रहण करते हैं।

  आप बेफिक्र रहिए।"


 (फिर इंस्पेक्टर रोबो अवर निरीक्षक मीनूश्री को कुछ ज़रूरी निर्देश देते हैं। सुमंगल थाने से निकल पड़ते हैं। फिर वे सुप्रसिद्ध पत्रकार   जयेश से मिलने उनके निवास स्थान की ओर  निकल पड़ते हैं। एक यही पत्रकार हैं उस     इलाके में जो कि ईमान से सच्ची बातें संपूर्ण   निरपेक्षता एवं निर्भिकता से लिखने का जज़्बा रखते हैं। सुमंगल अपने मन में अदम्य

  विश्वास लिए कार्यक्रम स्थल की ओर अपनी मोटरसाइकिल पर सवार होकर  निकल पड़ते हैं...)


  (पर्दा गिरता है।)






Rate this content
Log in