Akanksha Gupta

Inspirational


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मसाले

मसाले

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मेघा अपने मायके आई हुई थी। आज उसकी बड़ी बहन प्रीति लंदन से भारत लौट रही थी। सब लोग उनको लेने एयरपोर्ट पर मौजूद थे सिवाय मेघा के पति आयुष के। वह अपने ऑफ़िस से सीधे एयरपोर्ट पर आने वाला था लेकिन किसी काम की वजह से नहीं पहुंच पाया। उसने मेघा को मैसेज किया था लेकिन मेघा गुस्से में थी। उसने कोई रिप्लाई नहीं किया।


जल्द ही प्रीति का प्लेन एयरपोर्ट पर उतर चुका था। उनके एयरपोर्ट से बाहर आते ही सब ने उसका स्वागत फूलों की माला से किया। मेघा को देखते ही प्रीति ने उसे गले लगाया। मेघा का चेहरा उतरा हुआ था। जब प्रीति ने मेघा से इसकी वजह पूछी तो मेघा सवाल अनदेखा कर गई।

घर पहुंच कर प्रीति ने सब से हालचाल पूछा और उसके बाद आराम करने चली गई। उसके साथ मेघा भी आराम करने चली गई।


कमरे में पहुंच कर दोनों बहने पलंग पर लेटी तो प्रीति ने मेघा से पूछा- “क्या हुआ मेघा? जब से मैं आई हूँ, तू कुछ परेशान लग रही हैं। सब ठीक तो है ना?”

मेघा ने प्रीति को देखते हुए कहा- “आयुष मेरी कोई बात नहीं सुनते। मैने आज इनसे कहा था कि आप आने वाले हो, एयरपोर्ट पर आ जाए लेकिन फिर इनका वही बहाना।

प्रीति ने हंसते हुए कहा- “तो क्या मैं कोई मेहमान हूँ जो इस छोटी सी बात पर मुंह फूला कर बैठ जाउंगी। प्रीति के इस तरह समझाने पर भी मेघा मुँह फुलाये पड़ी रही।


अगले दिन दोनों बहनों ने घूमने फिरने का प्रोग्राम बनाया। पहले दोनों पिक्चर देखने गए और उसके बाद खाना खाने रेस्टोरेंट गये।

वहां जानबूझकर प्रीति ने तेज मसालों से बना खाना ऑर्डर किया और मेघा के साथ आ कर बैठ गई। जब यह खाना मेघा ने अपने मुंह में डाला तो उसका मुंह जल गया। जब प्रीति खाना वापस करने लगी तो मेघा ने मना कर दिया यह कहते हुए कि अभी तो पहला ही निवाला है, अगली बार कम जलन होगी।


इस पर प्रीति हँसते हुए बोली- “यही हाल जिंदगी के स्वाद का है मैडम। अभी तो तुम्हारी शादी को एक साल भी पूरा नहीं हुआ और तू चाहती हैं कि सब कुछ तेरे हिसाब से हो। जब तू यह बात समझ सकती है कि पहली बार तीखा खाने के बाद अगली बार कम जलन होगी तो यह बात रिश्तों पर भी लागू होती है। किसी नए परिवेश में ढलने के लिए भी इन मसालों की तरह पकना पड़ता है। हर मसाला सोच समझ कर और सही मात्रा में होना चाहिए। फिर चाहे वो धैर्य हो या सहयोग। जिंदगी के हर रिश्ते में इन सभी मसालों का सही तालमेल जरूरी है नहीं तो......”


“नहीं तो क्या पूरी जिंदगी पानी पी कर गुजारनी होगी।” यह कहते हुए मेघा हँस पड़ती हैं।



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