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Dimple Khanna

Abstract


4.3  

Dimple Khanna

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मजबूरी या मूर्खता

मजबूरी या मूर्खता

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अरे कोई है ! कोई तो सुनो !

हां तुम। तुम भी डरते हो उसी से ना ?इसलिए तो मास्क लगा रखा है। पर पर यह क्या ?तुम मास्क पर बार-बार हाथ क्यों लगा रहे हो ? इससे तो सभी को खतरा है। मुझे भी, मत करो ना ! ऐसे करोना हो जाएगा जाएगा। सभी डरे हैं ,देखो वो ठेली वाला। पहले कितने आम और कितने अनार और कितने ही फल होते थे उसके पास।

अब शायद बेचने को ही तरस गया है। खरीदा भी क्या होगा बेचने के लिए! उधर वो आदमी कूड़े के ढेर के पास खड़ा है !सफाई वाले कहां गए? सब लोग कहां जा रहे हैं ? कुछ समय पहले तो सब रुक गया था ना ?यह शोर क्यों हो रहा है? क्यों जल्दी लगी है सबको ?अरे ऐसे करो ना भागेगा !

यह तो तुम्हें भगा रहा है,भगा रहा है!! हो गए ना शुरू सब, फिर वही हरकतें वही कचरा सड़क पर फेंकना, थूकना, शोर मचाना ,चिल्लाना, सबको मैं मैं मैं मैं लगी है !!तनिक ठहरो मैं थक गई हूं ...अरे कोई है !!कोई तो सुनो.. कोई तो होगा ..तुम सुन रहे हो ना ...क्यों करूं मैं इतना काम कि मेरी जिंदगी हो जाए हराम ?किसके लिए इतना करूं और करते-करते जल्दी मरूं!! नहीं -नहीं -नहीं -नहीं ,किसके लिए करूं इतना काम ?और क्यों करो क्यों भाग रहे हैं सब के सब ?सब के सब जल्दी क्या है? इतनी जल्दी क्या है? अभी भी सबक नहीं सीखा ना नहीं सीखाना नहीं सीखा ना .....

 क्यों काटे तुमने वह पेड़ तुमने क्यों बनाया नया प्लास्टिक......


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