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ranjit kaur

Romance

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ranjit kaur

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मिलन

मिलन

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"...देखो जो मैं कह रहा हूं... वह बात तुम्हें हर हाल में पूरी करनी होगी ...याद रखो ...वरना मैं तुम्हें पूरी ज्यदाद से बेदखल कर दूंगा... मेरी इस बात को तुम सीरियसली लेना ...ऐसे मत समझ लेना मुझे..." रवि खन्ना गुस्से से बोल रहे थे।"... मगर डैड जिसको मैं जानता नहीं हूं ...जिंदगी में कभी मिला नहीं... मैं उससे शादी नहीं कर सकता...आपको अच्छी तरह से पता है कि मैं किसी और को पसंद करता हूं... आप मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं... रवि खन्ना के बेटे रणबीर खन्ना ने कहा।


"...यह ठीक कह रहा है... आप इसकी मर्जी के बिना इसकी शादी के बारे में कैसे सोच सकते हैं ... कौन सी दुनिया में रहते हैं आप... आपका कभी समझ में नहीं आया..."रणवीर की मॉम रतना जी बोली।"... तुम लोग अच्छे से जानते हो ...जब यह भी छोटा था और हम लोग पटियाला में रहते थे... शिव की वाइफ तो तुम्हारी बहुत अच्छी सहेली थी... इसीलिए शादी हमनें बचपन में ही तय कर दी थी ...तो अब टाइम आ गया है ...हम लोग उनसे मिलने के लिए चंडीगढ़ जा रहे हैं ...तुम लोगों की आपस में कभी बात नहीं हुई ...मगर हम दोनों दोस्तों की बात होती रहती है... मैं कौन सा कह रहा हूं कि शादी ही करनी है... एक बार इन बच्चों को मिल तो लेना चाहिए..." रवि जी बोले।


"...मुझे पता है जब इतने बड़े बिजनेसमैन के बेटे से उनकी बेटी की शादी होने के बात होगी ... वह तो एक मिनट में हां कह देंगे ...मुझे तो वहां जाने से ही डर लग रहा है...""... अगर तुम ही ऐसा बोलोगी तो शादी के लिए वो कैसे हां कहेगा और जिस लड़की से ये शादी करना चाहता है... उसको भी मैं अच्छे से जानता हूं ...वह भी हमारे पैसे की ही पीछे है... मुझे उनके बारे में हर बात पता है... ।"


उन सब की बात सुनकर नीचे आता हुआ सिकंदर बोला,"... क्या बात है छोटे पापा... किस बात के ऊपर सुबह-सुबह बहस हो रही है ...""...कुछ नहीं बेटा बस कोई बात नहीं...फिर भी क्या बात आप मुझे बताएं मैं आपकी प्रॉब्लम सॉल्व कर दूंगा ...""...तुम्हें याद होगा जब हम पटियाला में रहते थे ...हां पापा मुझे अच्छे से याद है चाहे मैं उसे वक्त बहुत छोटा था...""...तब मेरे दोस्त शिव कुमार जो कोई कॉलेज में लेक्चर था उसकी बेटी के साथ बचपन में इसकी शादी तय की थी ...अब उस बात को आगे बढ़ने का टाइम हो गया है ...और यह मां बेटे मेरी बात ही नहीं सुन रहे ... ।"


"...मुझे लगता है आज के जमाने में ऐसी शादियां नहीं होती... आपको पहले का टाइम नहीं है... अगर की शादी जबरदस्ती हो भी जाती है... तो कितने दिन चलेगी छोटे पापा... मैं सीधी बात कहने में यकीन रखता हूं..."सिकंदर ने कहा।


" ...तुम्हारी बात ठीक है... मगर एक बार मिल तो सकते हैं ...बिल्कुल मिलना चाहिए... वैसे क्या नाम था उस लड़की का.... मुझे थोड़ा-थोड़ा याद है..." "... स्नेहा स्नेहा नाम हैं उसका..."रवि खन्ना ने कहा ।"...बहुत मोटी हुआ करती थी वह... राइट अंकल ..."सिकंदर याद करते हुए बोला।"...पापा आप उसे मोटी लड़की की बात कर रहे हैं ...अब वह पूरी टुनटुन हो गई होगी... माम समझाए पापा डैड को... ऐसे नहीं हो सकता..."रणबीर अपनी मॉम से विनती कर रहा था।


माना इस खतरे से अनजान अपने पापा की हेल्थ की फिक्र कर रही थी। वो फैक्ट्री को एक अच्छे तरीके से चलाना चाहती थी। इसलिए उसने सबसे पहले उस लड़के, जिसे उसके पापा ने पसंद किया था। उस से हेल्प मांगने गई थी।


जब उसके पापा का एक्सीडेंट हुआ था। तब तो वो सभ से पहले हस्पताल पहुंच गया था । महेश खन्ना जी को एडमिट करने में उसने माना की बहुत हेल्प की थी। मनाल को उसका ऐसे हेल्प करना अच्छा भी लगा था। वो अपने दिल में उस के सपने संजोने लगी थी। वो उस के साथ जिंदगी भर के सपने देखने लगी थी। वो उसे अच्छा लगने लगा था।


मगर उसके बाद वह एक बार भी उसके पापा को देखने नहीं आया था। मनाल को लगा शायद वह किसी जरूरी काम में फंस गया होगा। इसलिए वह नहीं आ सका। उसके माम डैड भी उसके पापा को दाखिल करते वक्त हासपिटल पंहुच गए। उन्होंने मान की मॉम को संभालने में बहुत हेल्प की थी। मनाल को उसकी मॉम डैड भी अच्छी लगे थे ।उसे शोर्य की माम ने मनाल से कहा,"... बेटा तुम घबराओ नहीं... हम हैं तुम्हारे साथ... फिर शौर्य है... यह सब संभाल लेगा ... ।" जब माना को किसी सहारे की जरूरत थी तो सच में शौर्य और उसकी फैमिली ने मनाल की बहुत हेल्प की थी। उसके पापा का डिसीजन जो उन्होंने माना की शादी शौर्य के साथ करने का फैसला लिया था। माना को लग रहा था कि वह ठीक था।


पहले दिन तो शौर्य ने उसकी इतनी हेल्प की थी। वह दिन रात वहीं अस्पताल में उसके पास था । माना और उसकी मॉम के खाने पीने की भी उसने पूरी फिक्र की थी । "...माना मैं हूं तुम्हारे पास... तुम बिल्कुल मत घबराना ... मेरे होते हुए तुम्हें किसी चीज की फिक्र करने की जरूरत नहीं है... ।"वह माना को हौसला देता रहा था। माना को सचमुच उसका बहुत सहारा रहा था।


शौर्य एक बार हॉस्पिटल से घर गया था। फिर उसके साथ माना की कोई बात नहीं हुई थी। उसका फोन भी नहीं आया था। माना को यह बात थोड़ी अजीब जरूर लगी थी। मनाल ने बाद में सोच,"... शौर्य को जरूर कोई जरूरी काम हो गया होगा पहले तो वह दिन रात उसी के पास था... आपसे अपना काम भी तो देखना पड़ता है... ।" और इस टाइम उसे सबसे ज्यादा वही अपना लगा।


वो उसके घर चली गई। वहां पर पहुंच कर पता चला कर वह सब लोग वहां पर नहीं हैं। कहीं बाहर गए हुए हैं और शायद कुछ दिनों बाद लौटेंगे । उनके घर के गेट पर जो सिक्योरिटी गार्ड था मनाल ने उससे बात की थी। जब मनाल अंदर जाने लगी तो सिक्योरिटी गार्ड ने कहा ,"...मैडम घर पर कोई नहीं है ...""...शौर्य और उसके मॉम डैड में से कोई तो घर पर होगा...""... नहीं मैडम ...कई दिन हो गए वह जहां से बाहर गए हुए हैं...""... कुछ बता सकते हो कब तक आएंगे ...""...नहीं मैडम उन्होंने कहा है... कि हमें थोड़े दिन लगेंगे ...हम उसके बाद भी बाद ही आएंगे... आप चाहे तो फोन करके पूछ सकती हैं... ।"


उसने कई बार शोर्य का फोन ट्राई किया। मगर उसका फोन बंद आ रहा था ।फिर उसने उसे लड़के के मॉम डैड का नंबर भी ट्राई किया । फोन की बेल बजती रही। मगर किसी ने उसका फोन नहीं उठाया था। वह परेशान हो गई ।"... अचानक शौर्य और उसके मॉम डैड को क्या हो गया... वह तो उसकी इतनी हेल्प कर रहे थे ...और फिर शौर्य उससे प्यार भी करता है ...अब अचानक कोई उसका फोन भी नहीं उठा रहा..."वह सोचने लगी। कोई बात उसके पल्ले नहीं पड़ रही थी।


वह सोच भी नहीं सकती थी कि कोई शौर्य और उसकी फैमिली को डरा रहा था। इसलिए वह घर छोड़कर थोड़े दिनों के लिए कहीं पर और रहने चले गए थे। मगर माना को किसी बात की खबर नहीं थी।"...क्या करें ...ऐसा क्या हो गया... ।"


इतना तो वह समझ गई कि उसे जहां से हेल्प नहीं मिलेगी । मगर कारण क्या था? उस की समझ में नहीं आया था। उसके दिमाग में कई बातें चल रही थी,"... क्या मुझसे कोई गलती हुई है ...जो शोर्य और उसकी फैमिली मुझसे नाराज है... कोई मेरा फोन नहीं उठा रहा ...और शोर्य शहर से बाहर गया... मुझे बता कर भी नहीं गया... जब उसे पता है कि मेरे ऊपर कितनी बड़ी मुसीबत है... ।"


"...मैं पापा के किसी दोस्त से हेल्प मांगती हूं... शायद मुझे वहां से हेल्प मिल जाए ..."वो सोचने लगी। वह अपने पापा के कई फ्रेंड से मिली । मगर कोई तो उसे मिला नहीं ,किसी ने उसका फोन नहीं उठाया। अगर कोई मिल की तो उसने साफ-साफ मना कर दिया था कि वह मनाल की हेल्प नहीं कर सकता। इसलिए माना को दूसरी बार जहां पर आने की जरूरत नहीं है। उन सब के बातें सुनती रही । सब लोगों ने मनाल के साथ ऐसे बिहेव किया। जैसे माना मान के किसी बात का किसी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था । वो बहुत हैरान।



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