लिफ़्ट का लुत्फ़ 😂
लिफ़्ट का लुत्फ़ 😂
लिफ़्ट का लुत्फ़ 😂
तीन दोस्तों का मज़ादार कारनामा!
दफ़्तर की पाँचवीं मंज़िल पर रोज़ की तरह चहल-पहल थी। तभी तीन पक्के दोस्त—मिश्रा जी, गुप्ता जी और शर्मा जी, मुस्कुराते हुए लिफ़्ट में घुसे। बस फिर क्या था! किस्मत को यही शरारत सूझी और लिफ़्ट का दरवाज़ा बंद होते ही…
टूंऽऽऽऽ…
लिफ़्ट बीच रास्ते में ही धप्प से रुक गई!
मिश्रा जी की आँखें फटी की फटी रह गईं, "हे भगवान! ये तो वही लिफ़्ट है जिसमें पिछले हफ़्ते चायवाला फँसा था!"
गुप्ता जी तुरंत बोले, "तो क्या हुआ मिश्रा जी? चायवाला तो कम से कम गरमा-गरम चाय लाया था, हम क्या लाए हैं? बड़ा-सा झोला भरकर टेंशन?"
शर्मा जी ने अपना फ़ोन निकाला, स्क्रीन देखी और मुँह बनाकर बोले, "अरे यार, नेटवर्क तो गायब है! यानी आज तो हम पक्के वाले फँस गए।"
शुरू हुई लिफ़्ट में कॉमेडी!
मिश्रा जी घबराकर बटन दबाने लगे, "बचाओ! बचाओ! कोई बाहर है क्या?"
गुप्ता जी हँसते हुए बोले, "अरे मिश्रा जी! चिल्ला क्यों रहे हो? लिफ़्ट में कोई भूत थोड़ा ही रहता है जो आपकी पुकार सुनेगा!"
शर्मा जी ने माहौल हल्का करने के लिए कहा, "अरे छोड़ो यार! जब तक मदद आती है, हम टीवी के रियलिटी शो की तरह एक-दूसरे को अपना परिचय देते हैं।"
* मिश्रा जी: "मैं मिश्रा, उम्र 52 साल! और मेरा शौक है—लिफ़्ट में कभी न फँसना!"
* गुप्ता जी: "मैं गुप्ता, उम्र 48 साल! और मेरा शौक है—दिन-रात मिश्रा जी की टांग खींचना!"
* शर्मा जी: "मैं शर्मा, उम्र 45 साल! और मेरा शौक है—तुम दोनों का ड्रामा देखकर ताली बजाना!"
थोड़ी हलचल, ढेर सारी हँसी!
तभी अचानक लिफ़्ट हिली—खड़-खड़!
तीनों ख़ुशी से एक साथ उछल पड़े, "अरे वाह! चल पड़ी! चल पड़ी!"
लेकिन लिफ़्ट चींटी की चाल से बस एक इंच ऊपर खिसकी और फिर ठप्प!
गुप्ता जी ने अपना सिर पकड़ लिया, "ये लिफ़्ट तो बिल्कुल हमारी किस्मत जैसी है… थोड़ा आगे बढ़ती है और फिर अटक जाती है!"
शर्मा जी हँसते-हँसते बोले, "अगर AC बंद हो गया, तो मिश्रा जी तो मोमबत्ती की तरह पिघल जाएँगे!"
मिश्रा जी मुँह फुलाकर बोले, "मैं पिघलूँगा नहीं! लेकिन अगर तुम दोनों ने अपनी बकबक बंद नहीं की, तो मैं पटाखा बनकर फ़ट ज़रूर जाऊँगा!"
आज़ादी की मिठास
पूरे 20 मिनट बाद—ज़ूंऽऽ… लिफ़्ट का दरवाज़ा खुला!
बाहर गार्ड भैया हैरान खड़े थे। उन्होंने पूछा, "सर जी! आप लोग ठीक तो हैं? लिफ़्ट में फँस गए थे क्या?"
गुप्ता जी मुस्कुराकर बोले, "अरे नहीं भैया! हम तो अंदर पिकनिक मना रहे थे, तुम बहुत देर से आए!"
तीनों हँसते-खिलखिलाते बाहर निकले और पूरे दफ़्तर में यह बात फैल गई—
"आज लिफ़्ट में तीनों दोस्त फँसे थे… और उनका मज़ाक सुनकर बेचारी लिफ़्ट ही थककर हार मान गई!"
