रोबीली सुरक्षा
रोबीली सुरक्षा
रोबीली सुरक्षा
गाँव के मशहूर मज़ाकिया रामपाल भैया अपनी रोबीली छवि बनाए रखने के लिए हमेशा मुस्तैद रहते थे। उस रात अंतिम यात्रा से लौटते समय उन्होंने श्मशान के बाहर से एक तेज़ आवाज़ वाली लाल सीटी खरीदी। उनके दिमाग में खुराफाती विचार आया कि आज तो गाँव के सबसे डरपोक लल्लूराम को डराकर पूरे गाँव में अपनी धाक जमा देनी है।
वे रात के ग्यारह बजे श्मशान के पुराने पीपल के पेड़ के पीछे जाकर छिप गए। थोड़ी देर में लल्लूराम डर के मारे ज़ोर-ज़ोर से हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए वहाँ से गुज़रे। जैसे ही वे पास पहुँचे, रामपाल भैया ने पेड़ के पीछे से सीटी बजाई— "पीपीपीपीपी...!"
लल्लूराम वहीं ठिठक गए और हाथ जोड़कर काँपती आवाज़ में बोले, "ऐ भूत साहब! मुझे बख्श दो, मैं तो गरीब आदमी हूँ!"
पेड़ के पीछे छिपे रामपाल भैया मन ही मन अपनी चाल पर हँस रहे थे। लेकिन ठीक उसी पल, उनकी नज़र पेड़ के तने पर पड़ी। वहाँ एक विशाल, मूँछों वाला उड़ने वाला कॉकरोच सीधा उनकी तरफ रेंगता हुआ आ रहा था!
रामपाल भैया का सारा रोब और भूत का खेल एक सेकेंड में हवा हो गया। खुद का डर ज़ाहिर न होने देने के लिए उन्होंने फौरन दिमाग चलाया— अगर चिल्लाया तो गाँव भर में इज़्ज़त का कबाड़ा हो जाएगा! लेकिन कॉकरोच को और करीब आता देख उनका सारा धैर्य जवाब दे गया।
अपने डर को 'सुरक्षा प्लान' का नाम देते हुए, वे बिना कुछ बोले पेड़ के पीछे से रॉकेट की तरह निकले और एक लंबी छलांग लगाकर सीधे लल्लूराम की गोद में जा बैठे!
लल्लूराम आँखें बंद करके प्रार्थना कर रहे थे, तभी अचानक 80 किलो के रामपाल भैया के गोद में कूदने से वे हक्के-बक्के रह गए। रामपाल भैया ने अपनी भारी आवाज़ में डर छुपाने की नाकाम कोशिश करते हुए कहा, "लल्लू! डरना मत! मैं तेरी रक्षा करने के लिए आया हूँ! देख, नीचे एक संदिग्ध ज़हरीला जीव घूम रहा है, मैं ऊपर से उस पर कड़ा पहरा दे रहा हूँ!"
लल्लूराम ने टॉर्च जलाकर नीचे देखा तो वही छोटा सा कॉकरोच मजे से टहल रहा था।
लल्लूराम सारा खेल समझ गए और रामपाल भैया को नीचे उतारते हुए हँसकर बोले, "वाह रामपाल भैया! मुझे डराने आए थे और अपनी 'रक्षक' वाली चालाकी के चक्कर में मेरी गोद में आ बैठे?"
अगले दिन पूरे गाँव के चौपाल में रामपाल भैया के इस "रोबीली सुरक्षा" और लल्लूराम की गोद वाले किस्से पर ज़ोरदार ठहाके लग रहे थे!
