लघु कथा - पानी की लड़ाई
लघु कथा - पानी की लड़ाई
आज शुबह शुबह मै अभी बिछौने पर पड़े पड़े आज के कार्यो की योजना बना ही रहा था की आज कौन कौन से काम करने है ,तभी घर के बाहर मोहल्ले मे औरतों के ज़ोर ज़ोर से लड़ने झगड़ने की आवाज़े आने लगी ,मैंने चाय की प्याली लेकर आती हुई अपनी पत्नी से पूछा -बाहर कैसा शोरगुल हो रहा है ,मेरी पत्नी ने बताया -पानी के लिए झगड़ा हो रहा है ,आज कई डीनो के बाद नल चालू हुआ है ,इसलिए पहले मै पहले मै पानी भरने के लिए मोहल्ले की औरते ज़ोर आजमाइस का आपस मे लड़ रही है।
मैंने चाय की प्याली टेबुल पर रखी और बाहर की ओर भागा ,वहा जाकर देखा औरते जार ,बालटी ,डे गची और घड़ा लेकर आपस मे धक्का मुक्की कर रही हैं। मैंने ज़ोर से आवाज देकर उनको रोकते हये कहा – ऐसे मे तो आप लोग पानी नहीं भर पाएँगी ,सारा पानी बह कर बरबाद हो जाएगा।थोड़ी देर मे नल भी बंद हो जाएगा। आपलोग ऐसा करे सब लोग अपना अपना बरतन लाइन से रख दे ,म्जिसका नंबर आएगा वो पानी भर लेगी,हालंकि नियम से काम करना मोहल्ले की शान के खिलाफ था फिर भी सबके पास इसके अलावा कोई चारा भी नहीं था क्योकि पानी की सबको सख्त जरूरत थी , सभी महिलाए बारी बारी से शांति से पानी भरने लगी।
तीन साल पहले भी मैंने ही सीसीएल के महाप्रबन्धक से अनुरोध कर मोहल्ले मे पानी की टंकी नल सहित लगवाया था ,इससे पहले मोहल्ले की लड़कियां और महिलाए दूर दूर जाकर चापाकलऔर कुंआ से पानी भरकर लाती थी ,उनकी परेशानी देखकर मैंने सीसीएल की ही मदद से दूसरे मोहल्ले मे लगी बोरिंग मशीन से नल का पाइप खिंचवाकर मोहल्ले तक लाया था नल लगवा दिया था ,लेकिन मोहल्ले वालों ने आपस मे लड़ झगड़कर कुदाल गइता लेकर नल को ही उखाड़ फेंका था और फिर वही पानी की समस्या शुरू हो गई थी।
मैंने नगर परिषद के चेयरमेन से अनुरोध किया की हमारे मोहल्ले मे एक ही नल है जो कभी कभी चलता है ,इस भीषण गर्मी मे वहा पानी की काफी किल्लत है , नल चालू होते ही पानी के लिए मारा मारी शुरू हो जाती है ,अगर सप्ताह मे दो तीन दिन पानी का टेनकर भेज दिया जाता तो वहा के लोगो मो पानी सज़े काफी राहत मिलेगी ,चेयरमैन साहब ने मेरा अनुरोध स्वीकार कर लिया और अपने अधीन कर्मचारी को पानी टेंकर भेजने का आदेश दे दिया।
मैं अपनी मोटर साइकिल से जैसे ही मोहल्ले दाखिल हुआ देखा वहा काफड़ी भीड़ जमा हुई थी और काफी हो हल्ला और धक्का मुक्की हो रही थी ,मैंने देखा की पानी का टेंकर लगा हुआ था ,जिसे मोहल्ले वालो ने छजरों तरफ से घेर रखा था , पहले पानी भरने के प्रयास मे एक दूसरे का बरतन उठाकर इधर उधर फेंक रहे थे।
मैंने किसी तरह अपनि मोटरसाइकिल कीनारे खड़ा किया और चिल्लाकर कहा – मै क्या करु आपलोगो का कितनी मुश्किल से ये टेंकर पास करवाया है और आप लोग फिर जानवरो की तरह लड़ रहे है , सब लोग लाइन मे अपना बरतन रखिए और बारी बारी पानी भरे ,इतना कहकर मैंने सबका बरतन बड़ी मुश्किल से लाइन मे लगवाया और सबको समझा बूझाकर अपने घर चला आया।
खाना अभी खत्म भी नहीं किया था की दरवाजे पर ज़ोर ज़ोर से पीटने की आवाज आई ,मैंने अपनी पत्नी को इसारा किया वो दौड़ती हुई गई और दरवाजा खोल दी,दरवाजा खुलते ही उसने देखा मोहल्ले की चार औरते अपना सिर पकड़े खड़ी थी, दीदी जी देखिये न रमुया, सोमरा ,भूलना और बिरजुआ ने हमलोगो का मार कर कपार फोड़ दिया है ,उनके सिर से काफी खून बह रहा था।
उनको ऐसी हालत मे देखते ही मेरी पत्नी ने दरवाजे से ही
चील्लाकर कहा -अजी सुनते है जल्दी बाहर आइये ,अपनी पत्नी की आवाज सुनते ही में खाना छोड़कर भागते हुये दरवाजे पर पहुंचा और देखकर चौक गया , सारा हाल समझ कर मैंने अपना सिर पकड़ लिया , हे भगवान इस मोहल्ले का भगवान ही मालिक है , कितनी भी कोशिश किया की यहाँ पानी की समस्या न रहे और लोग आपस मे मिलजुलकर रहे मगर मेरा सारा प्रयास बिफल रहा,हालांकि मै कोई जन प्रतिनिधि या नेता नहीं हूँ एक मामूली सा सामाजिक कार्यकर्ता हूँ इसलिए अन्य लोगो के अलावा अपने मोहल्ले के लिए भी हर संभव प्रयास करता रहता हूँ ,मगर अफसोस यहाँ के लोगो में आपस मे कोई तालमेल नहीं है ,कोई एक दूसरे के लिए त्याग नहीं करना चाहता, सार्वजनिक चीजों की कीमत नहीं समझते इसलिए अन्य समस्यायों के अलावा पानी की समस्या यहाँ अभी भी बनी हुई है।
मैंने पुलिस थाना को फोन कर दिया ,थोड़ी देर मे पुलिस की चार गाड़िया आ गई और मोहल्ले के लगभग एक दर्जन मर्दो और औरतों को उठाकर थाने ले गई।
