लाल सारी की राज
लाल सारी की राज
एक हबेली थी उस हबेली मे तीन लोग हीं रहते है एक देवी जो 10 साल की है देवी के दादा दादी देवी ने अपनी दादी से जिद करने लगी कोई अच्छी सी कहानी सुनाओ दादी सुनाओ ना दादी हाँ बाबा सुनती हू एक छोटी सी शहर थी उसी शहर मे एक बड़ा सा हबेली थी उस हवेली मे खुशियाँ हीं खुशियाँ थी उस हबेली के मालिक उका नाम था रूद्र प्रताप सिंह था बहुत हीं हिम्मत बाला यही उनकी बीबी थी जिनका नाम था लीलाबती दोनों के एक बेटा हुआ उसका नाम यस प्रताप सिंह था यश प्रताप को प्यार से यश बुलाते थे यश को बिदेस भेज बिया पढ़ने को जब यश का पढ़ाई पूरा हो गया तो बापस सपने शहर आ गए यश ने एक लड़की को अपने साथ लेकर आया था तो यश का पापा रूद्र प्रताप सिंह ने बहुत गुस्सा हो गई उस लड़की को अपनी बहु मानने से साफ - साफ इनकार कार दिया यश ने अपने पापा को काफ़ी मनाया रूद्र प्रताप ने यश को रहने की परमिसन तो दे दिया पर अपने नही यश की बीबी का नाम थी सुमन दोनों बहुत हीं खुश रहते थे एक दिन सुमन बाजार गई ओहा से एक सारी लाइ लाल काले की सारी बहुत हीं सुन्दर थी पर पहनेका मौका हीं नही मिला इतने मे देवी बोली दादी सारी लाइ तो पहने का मौका क्याे नही मिला दादी क्या की सुमन माँ बनने बाली थी इस लिए सारी नही पहनी सुमन एक बेटी को जन्म दी और ऐसे हीं 2 साल निकल गए सुमन यश मै क्या कह रही हू इस बार अपनी एनीवसरी मनाए क्या यश है सुमन इस बार मानते है सुमन और याद की एनीवसरी की रात ने अपनी वो लाल सारी निकली पहनने के लिए पहनकर निचे आई सुमन को सब देखते हीं रह गई इतनी सुंदर लाग रही थी अब केक काटते है यश और सुमन केक कट किये सब ने पानी अपनी गिफ्ट दिया लेकिन अचानक सुमन की रेब्या बदल गई सब पर जोर जोर से चिलाने लगी सब सोच मे पर गये ऐ क्या हुआ अभी तो सब सही था अचनाक क्या हुआ दादी चुप हो गई देवी बोली फिर क्या हुआ दादी बताओ न दादी बोली फिर सुमन को हॉस्पिटल ले गए उसे वहा पर इलाज हुआ पर कुछ नही हुआ काफ़ी जगहों पर दिखाया कुछ नही हुआ फिर एक दिन सुमन को एक बाबा के पास लेकर गए और सुमन को दिखलाया बाबा बोले ऐ सारी कहाँ से लाइ है लीला बती बोली बाबा सारी बाजार से लाइ है ऐ बहुत गलत हुआ है यश को बाबा बोले तुम अभी जाओ और बो सारी लेकर आओ यश ने ऐसा हीं किया सारी लेकर बाबा को देदिया बाबा ने कुछ मन्त्र पढ़े और सारी को एक सुनसान जगहों पर गार दिया सुमन ठीक होने लगी लेकिन सारी का एक कोना लेट समय अल्बरी मे फस का फट जाता है और टुकड़ा उसी अनबरी मे रह जाता है सुमन घर तो आ गई पर सारी की कहानी भी आ गई एक दिन सुमन यश क्या बाहर घूमने चले काफ़ी दिन हो गया है यश ने जाने को तैयार हो गई जाते समय एक्सीडेंट हो गया उसे हॉस्पिटल लेकर जा हीं रहे थे की दोनों को मौत हो गई दादा अब सो जाओ कहानी ख़त्म हो गई देवी दादी आप सच बताओ ऐ माँ और पापा के बारे मे था न दादी रोने लगी देवी दादी आप चुप हो जाओ मै होना आप के सात ♥️♥️♥️♥️♥️

